प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तलाक के 30 दिन बाद दूसरी शादी करने वाली महिला को मासिक भरण-पोषण दिए जाने के फैमिली कोर्ट के आदेश पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि दूसरी शादी के बाद पत्नी भरण-पोषण की हकदार नहीं रहती। मामले में हाई कोर्ट ने झांसी के अपर प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट से स्पष्टीकरण तलब किया है कि दूसरी शादी की जानकारी होने के बावजूद भरण-पोषण का आदेश किस आधार पर पारित किया गया। फैमिली कोर्ट के आदेश को दी गई चुनौती…
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शादी का वादा टूटना ही रेप नहीं! हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी के खिलाफ चार्जशीट से लेकर पूरी कार्यवाही रद्द
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल शादी का वादा पूरा न होना अपने आप में दुष्कर्म का अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में यह साबित होना आवश्यक है कि शुरुआत से ही शादी का वादा धोखा देने की नीयत से किया गया था और उसी आधार पर सहमति हासिल की गई थी। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने आरोपी के खिलाफ दर्ज चार्जशीट, समन आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह…
Read Moreपत्नी पढ़ी-लिखी और कमाने में सक्षम हो तो भी मिल सकता है गुजारा भत्ता, इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी
लखनऊ: क्या केवल शिक्षित होने या कमाने की क्षमता रखने भर से पत्नी भरण-पोषण की हकदार नहीं रहती? इस अहम सवाल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए साफ किया है कि पत्नी के पढ़े-लिखे होने या नौकरी करने की क्षमता भर से उसे सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता मांगने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि असली सवाल यह है कि क्या पत्नी के पास वर्तमान समय में खुद का भरण-पोषण…
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