बैलगाड़ी से पेट्रोल पहुंचा, फिर रचा इतिहास! 96 साल पहले JRD टाटा ने ऐसे शुरू की थी एयर इंडिया की पहली उड़ान

नई दिल्ली: आज जिस एयर इंडिया को देश की प्रमुख विमानन कंपनियों में गिना जाता है, उसकी शुरुआत की कहानी बेहद दिलचस्प है। 15 अक्टूबर 1932 को जेआरडी टाटा ने टाटा संस की पहली निर्धारित डाक उड़ान संचालित की थी। उस ऐतिहासिक सफर में कराची से अहमदाबाद होते हुए बंबई तक विमान पहुंचा था। इस उड़ान से जुड़ा एक खास किस्सा यह भी है कि अहमदाबाद में विमान में ईंधन भरने के लिए बैलगाड़ी से पेट्रोल लाया गया था। भारतीय विमानन इतिहास की यह शुरुआत उस दौर की याद दिलाती है, जब हवाई यात्रा और डाक सेवा देश में नए दौर की नींव रख रहे थे।

25 किलो डाक लेकर आसमान में उड़ा था विमान

15 अक्टूबर 1932 को जेआरडी टाटा ने डी हैविलैंड पुस मॉथ विमान उड़ाकर टाटा संस की पहली निर्धारित हवाई डाक सेवा की शुरुआत की। विमान ने कराची से उड़ान भरी और अहमदाबाद होते हुए बंबई पहुंचा। इस सफर में करीब 25 किलोग्राम डाक ले जाई गई थी।

उस समय भारत में विमानन सेवाएं शुरुआती दौर में थीं। हवाई जहाज के जरिए डाक पहुंचाना न केवल परिवहन का नया तरीका था, बल्कि इससे यह साबित करने की कोशिश भी की जा रही थी कि विमान देश के अलग-अलग शहरों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

बैलगाड़ी से पेट्रोल पहुंचाने का दिलचस्प किस्सा

इस ऐतिहासिक उड़ान से जुड़ा सबसे अनोखा प्रसंग अहमदाबाद में सामने आया। विमान को आगे की यात्रा के लिए ईंधन की जरूरत थी। ऐसे में पेट्रोल को चार-गैलन वाले डिब्बों में बैलगाड़ी के जरिए विमान तक पहुंचाया गया। आज के आधुनिक हवाई अड्डों और विमानों के दौर में यह घटना भारतीय विमानन के शुरुआती दिनों की परिस्थितियों को समझने का एक दिलचस्प उदाहरण है।

उस समय हवाई सेवाओं के संचालन के लिए बुनियादी सुविधाएं सीमित थीं। इसके बावजूद जेआरडी टाटा और उनकी टीम ने इस पहल को साकार किया और देश में व्यावसायिक विमानन की नींव मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।

नेविल विंटसेंट ने भी निभाई अहम भूमिका

भारत में हवाई डाक सेवा की शुरुआत के पीछे जेआरडी टाटा के साथ नेविल विंटसेंट का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा। रॉयल एयर फोर्स के पूर्व पायलट विंटसेंट ने कराची, बंबई और मद्रास को जोड़ने वाली हवाई डाक सेवा का प्रस्ताव रखा था।

15 अक्टूबर को कराची से बंबई तक डाक पहुंचाने के बाद विंटसेंट ने एक अन्य पुस मॉथ विमान उड़ाया। वह बेल्लारी होते हुए मद्रास पहुंचे। इस तरह शुरुआती हवाई सेवा के जरिए देश के कई प्रमुख शहरों को जोड़ने की दिशा में काम आगे बढ़ा।

टाटा एयरलाइंस से एयर इंडिया तक का सफर

टाटा संस के विमानन विभाग ने आगे चलकर एक बड़ी कंपनी का रूप लिया। वर्ष 1938 में यह टाटा एयरलाइंस बना और 1946 में इसका नाम बदलकर एयर इंडिया लिमिटेड कर दिया गया। जेआरडी टाटा की अगुवाई में कंपनी ने भारतीय विमानन क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।

जेआरडी टाटा को भारत में नागरिक विमानन उद्योग के अग्रदूतों में गिना जाता है। वर्ष 1929 में वह भारत में विमान उड़ाने का लाइसेंस हासिल करने वाले पहले भारतीय बने थे। इसके बाद उन्होंने विमानन क्षेत्र में अपने अनुभव और दूरदृष्टि के जरिए देश में हवाई परिवहन के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

50 साल बाद जेआरडी टाटा ने दोहराया ऐतिहासिक सफर

इस ऐतिहासिक उड़ान के करीब 50 साल बाद, वर्ष 1982 में जेआरडी टाटा ने एक बार फिर विमान उड़ाकर उस यादगार यात्रा को दोहराया। यह सफर उनके विमानन प्रेम और उस पहल से जुड़े गहरे जुड़ाव का प्रतीक बना, जिसने भारत में व्यावसायिक हवाई सेवाओं की शुरुआत की थी।

एयर इंडिया के राष्ट्रीयकरण के बाद भी जेआरडी टाटा कंपनी के अध्यक्ष बने रहे। विमानन क्षेत्र में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाता रहा और उनकी पहचान भारत में नागरिक विमानन के विकास से जुड़ी रही।

2022 में टाटा समूह के पास लौटी एयर इंडिया

एयर इंडिया के इतिहास में वर्ष 2022 भी एक अहम पड़ाव बना, जब कंपनी फिर से टाटा समूह के नियंत्रण में आ गई। इसे एयर इंडिया की टाटा समूह में वापसी के रूप में देखा गया। करीब नौ दशक पहले एक छोटे विमान से शुरू हुआ यह सफर भारतीय विमानन उद्योग के विकास की महत्वपूर्ण कहानी बन चुका है।

बैलगाड़ी से पेट्रोल पहुंचाने की घटना से लेकर आधुनिक विमानन सेवाओं तक एयर इंडिया का इतिहास बताता है कि शुरुआती दौर की सीमित सुविधाओं के बीच भी दूरदृष्टि और प्रयासों से बड़े बदलाव की नींव रखी जा सकती है।

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