सहारनपुर में गर्भवती पत्नी की हत्या करने वाले पति को उम्रकैद, कोर्ट बोला- ‘ये सिर्फ जीवन नहीं, विश्वास की भी हत्या’

सहारनपुर: आठ साल पुराने गंगोह के पिंकी हत्याकांड में अदालत ने उसके पति आशीष को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या एक के अपर सत्र न्यायाधीश श्रेय शुक्ला ने आशीष पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अदालत ने मामले में आशीष की मां रामो, भाई सिकंदर और भाभी बबीता को आरोप सिद्ध नहीं होने पर संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

मामले की शिकायत पक्की गढ़ी, जिला शामली निवासी संजय ने 28 मई 2018 को गंगोह थाने में दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, उनकी बेटी पिंकी की शादी 3 नवंबर 2017 को आशीष पुत्र नरेश के साथ हुई थी। शादी में दान-दहेज दिया गया था, लेकिन आरोप था कि ससुराल पक्ष इससे संतुष्ट नहीं था और दहेज की मांग को लेकर पिंकी को प्रताड़ित किया जाता था।

पड़ोस से मिली थी पिंकी की हत्या की सूचना

28 मई 2018 की सुबह पिंकी के मायके वालों को उसके ससुराल के पड़ोस से फोन पर सूचना मिली कि पिंकी की गला रेतकर हत्या कर दी गई है। सूचना मिलने के बाद परिवार में हड़कंप मच गया।

मामले में यह भी सामने आया कि आशीष की गर्दन पर भी चोट के निशान थे। इसके चलते उसे इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया, जहां करीब तीन महीने तक उसका उपचार चला।

पुलिस ने पति समेत चार लोगों के खिलाफ दाखिल की थी चार्जशीट

पुलिस ने 4 नवंबर 2018 और 13 फरवरी 2019 को आशीष, उसकी मां रामो, भाई सिकंदर और भाभी बबीता के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्या समेत संबंधित धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया था।

वहीं, आशीष का कहना था कि रात के समय उसके घर में चोर घुसे थे और उन्होंने पिंकी तथा उस पर हमला किया था। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने आशीष को पिंकी की हत्या का दोषी माना।

उस्तरे से किए थे सात वार, गर्भवती थी पिंकी

अदालत ने कहा कि हत्या दहेज के कारण हुई हो, यह साक्ष्यों से साबित नहीं हुआ, लेकिन यह स्पष्ट है कि आशीष ने गर्भवती पिंकी की हत्या की। अदालत के मुताबिक, आशीष ने पिंकी पर उस्तरे से सात वार किए और उसकी जान ले ली। साथ ही उसने खुद की जान लेने की भी कोशिश की थी।

इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने आशीष को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

मां, भाई और भाभी को मिला संदेह का लाभ

मामले में आरोपी बनाए गए आशीष की मां रामो, भाई सिकंदर और भाभी बबीता के खिलाफ आरोप साबित नहीं हो सके। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

इस तरह आठ साल तक चले मामले में हत्या के आरोप में पति आशीष को दोषी ठहराया गया, जबकि परिवार के अन्य तीन आरोपियों को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।

कोर्ट ने कहा- शादी का रिश्ता जीवन, सुरक्षा और विश्वास पर टिका होता है

आशीष को सजा सुनाते हुए न्यायाधीश श्रेय शुक्ला ने अपने आदेश में वैवाहिक रिश्ते में विश्वास के महत्व का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की हत्या केवल उसकी जिंदगी खत्म करना नहीं होती, बल्कि इससे उसके परिवार के रिश्तों, उम्मीदों और भविष्य पर भी गहरा असर पड़ता है।

अदालत ने कहा कि आशीष ने अपनी जीवनसंगिनी की हत्या उस समय की, जब वह गर्भवती थी। जिस व्यक्ति के साथ जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया गया था, उसी के हाथों उसकी जिंदगी खत्म होना केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि उस विश्वास के बंधन की भी निर्मम हत्या है, जिस पर वैवाहिक संबंध आधारित होते हैं।

अदालत ने कहा कि विवाह का रिश्ता जीवन, सुरक्षा और विश्वास का संबंध होता है।

 

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