न्यूयॉर्क: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भाषण शुरू होते ही कई देशों के डिप्लोमैट्स विरोध में हॉल से बाहर निकल गए। रिपोर्टों के मुताबिक, बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों के वॉकआउट के बाद महासभा हॉल की कई सीटें खाली नजर आईं। वहीं, हॉल में मौजूद कुछ लोगों ने नेतन्याहू के समर्थन में तालियां बजाईं और हिब्रू में ‘अम इस्राइल चाई’ यानी ‘इजराइल के लोग जिंदा हैं’ के नारे लगाए।
वॉकआउट पर नेतन्याहू ने क्या कहा
नेतन्याहू ने अपने भाषण की शुरुआत में ही हॉल से बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर कोई और ‘नैतिक रूप से कायर’ या सिद्धांतों पर कायम न रहने वाला प्रतिनिधि अभी भी हॉल में मौजूद है तो वह भी बाहर चला जाए। उनके इस बयान के दौरान महासभा में शोर और विरोध के बीच व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई।
ईरान पर इजराइल की सैन्य कार्रवाई का बचाव
करीब 40 मिनट के संबोधन में नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हमले को प्रधानमंत्री के तौर पर लिए गए सबसे आसान फैसलों में से एक बताया। नेतन्याहू के मुताबिक, अगर इजराइल ने यह कार्रवाई नहीं की होती तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे।
उन्होंने ईरान की मौजूदा सरकार को लेकर भी कहा कि यह शासन अंततः खत्म हो जाएगा और ईरानी लोग आजाद होंगे। नेतन्याहू ने इजराइल की आलोचना करने वाले प्रदर्शनकारियों और राजनयिकों से ईरान की कार्रवाइयों को लेकर उनकी चुप्पी पर सवाल भी उठाया।
‘कई देशों ने निजी तौर पर धन्यवाद दिया’
वॉकआउट करने वाले देशों के प्रतिनिधियों पर निशाना साधते हुए नेतन्याहू ने दावा किया कि कुछ देशों के नेताओं ने ईरान के खिलाफ इजराइल की कार्रवाई के लिए उन्हें निजी तौर पर धन्यवाद दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सार्वजनिक तौर पर इजराइल की आलोचना की जाती है तो निजी बातचीत में समर्थन क्यों जताया जाता है। यह नेतन्याहू का दावा था और उपलब्ध रिपोर्ट में इसकी स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख नहीं है।
गाजा पर नरसंहार के आरोपों को किया खारिज
नेतन्याहू ने गाजा में इजराइल की सैन्य कार्रवाई को लेकर लगाए जा रहे नरसंहार के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि इजराइल ने नरसंहार नहीं किया, बल्कि उनके अनुसार उसने नरसंहार को रोकने का काम किया है। उनके भाषण के दौरान गाजा में इजराइल की कार्रवाई और उसकी अंतरराष्ट्रीय आलोचना भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रही।
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर भी साधा निशाना
नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी का भी जिक्र किया। ममदानी ने नेतन्याहू को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि नेतन्याहू ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन पर इजराइल के खिलाफ अभियान चलाने का आरोप लगाया। दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी भी नेतन्याहू की न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान चर्चा में रही।
UN मुख्यालय के बाहर भी प्रदर्शन
नेतन्याहू के संबोधन से पहले न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर भी प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने गाजा और इजराइल की सैन्य कार्रवाई से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध जताया। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया।
ट्रंप की तारीफ, अमेरिका के साथ रिश्तों पर दिया जोर
अपने भाषण में नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि इजराइल को ट्रंप से बड़ा सहयोगी नहीं मिला है और दोनों देशों ने मिलकर बड़े खतरों का सामना किया है। नेतन्याहू की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब इजराइल में 27 अक्टूबर को चुनाव होने हैं।
ईरान, गाजा और क्षेत्रीय सुरक्षा पर केंद्रित रहा भाषण
करीब 40 मिनट के संबोधन में ईरान, गाजा, वेस्ट बैंक और इजराइल की क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। हालांकि, भाषण की शुरुआत में कई देशों के प्रतिनिधियों का सामूहिक वॉकआउट पूरे घटनाक्रम का सबसे चर्चित दृश्य रहा।
