नई दिल्ली: आगामी चुनावी चुनौतियों और संगठन को नई धार देने की तैयारी में कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मंजूरी के बाद उत्तर प्रदेश, हरियाणा और ओडिशा के लिए नए एआईसीसी प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी राजेंद्र पाल गौतम को सौंपी है, जबकि ओडिशा में लालजी देसाई और हरियाणा में संजय दत्त को नया प्रभारी नियुक्त किया गया है। ये सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।
तीन राज्यों में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी
कांग्रेस नेतृत्व ने इन बदलावों के जरिए तीन महत्वपूर्ण राज्यों में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने का संकेत दिया है। पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में पूर्व प्रभारियों के कार्यों की सराहना भी की गई है। उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रभारी अविनाश पांडे के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया, वहीं बी.के. हरिप्रसाद और अजय कुमार लल्लू के कार्यों की भी प्रशंसा की गई।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि नए प्रभारियों के जरिए संगठन को अधिक सक्रिय बनाया जाएगा और चुनावी तैयारियों को नई गति मिलेगी।
यूपी में राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति के राजनीतिक मायने
उत्तर प्रदेश में राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह दिल्ली सरकार में मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनुसूचित समाज के बीच उनकी पहचान और सक्रियता को देखते हुए कांग्रेस ने यह फैसला लिया है। माना जा रहा है कि पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
दलित वोट बैंक पर नजर, संगठन को नई दिशा देने की कोशिश
कांग्रेस लंबे समय से उत्तर प्रदेश में अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की चुनौती से जूझ रही है। ऐसे में राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति को दलित समुदाय में पहुंच बढ़ाने और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
पार्टी यह संदेश भी देना चाहती है कि वह संगठन में नए नेतृत्व को अवसर देने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
हरियाणा और ओडिशा में भी नई रणनीति
हरियाणा में संजय दत्त और ओडिशा में लालजी देसाई की नियुक्ति को भी कांग्रेस की व्यापक संगठन विस्तार योजना का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व इन राज्यों में जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
अब राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर टिकी है कि नए प्रभारी अपने-अपने राज्यों में संगठन को कितना मजबूत कर पाते हैं और आने वाले चुनावों से पहले कांग्रेस को कितना राजनीतिक लाभ दिलाने में सफल रहते हैं।
