नई दिल्ली: भारतीय टेस्ट टीम में लगातार हो रहे बदलावों के बीच पूर्व उपकप्तान अजिंक्य रहाणे ने टीम के संतुलन को लेकर चिंता जताई है। उनका मानना है कि टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे प्रारूप में केवल युवा खिलाड़ियों के भरोसे सफलता हासिल करना आसान नहीं है। रहाणे के अनुसार टीम में अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का सही संतुलन होना बेहद जरूरी है।
अनुभव और युवा जोश का होना चाहिए संतुलन
एक बातचीत के दौरान अजिंक्य रहाणे ने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारतीय टेस्ट टीम में कई नए खिलाड़ियों को मौका मिला है, लेकिन अनुभवी खिलाड़ियों की संख्या लगातार कम होती गई है। उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में सात से आठ सीनियर खिलाड़ियों के साथ दो से तीन युवा खिलाड़ियों का संयोजन सबसे बेहतर माना जाता है। मौजूदा टीम में अधिकांश खिलाड़ी नए हैं, जिससे अनुभव की कमी साफ दिखाई देती है।
सीनियर खिलाड़ियों की भूमिका को बताया अहम
रहाणे ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में अनुभव की अहम भूमिका होती है और सीनियर खिलाड़ियों का सम्मान किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक टीम में अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी युवा खिलाड़ियों के विकास और कठिन परिस्थितियों से निपटने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। उन्होंने यह भी कहा कि लगभग सभी वरिष्ठ खिलाड़ियों का एक साथ टीम से बाहर होना भारतीय टेस्ट क्रिकेट के लिए चिंता का विषय है।
श्रीलंका दौरे से पहले बढ़ी चर्चा
भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जानी है। शुभमन गिल की कप्तानी में भारतीय टीम इस सीरीज में जीत दर्ज कर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहेगी। सीरीज शुरू होने से पहले रहाणे का यह बयान क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है।
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की दौड़ में अहम होगी सीरीज
भारतीय टीम के लिए आगामी श्रीलंका दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल की रेस में बने रहने के लिए भारत को अपने अगले नौ टेस्ट मैचों में कम से कम छह मुकाबले जीतने होंगे। ऐसे में श्रीलंका के खिलाफ यह सीरीज टीम के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। रहाणे के बयान ने एक बार फिर इस बहस को तेज कर दिया है कि भारतीय टेस्ट टीम में युवा खिलाड़ियों के साथ अनुभवी खिलाड़ियों का संतुलन कितना जरूरी है।
