न्यायिक अधिकारियों की संयुक्त टीम ने अनाथ आश्रम, वृद्धाश्रम एवं शेल्टर होम का किया औचक निरीक्षण

वृद्धजनों, बच्चों एवं आश्रय गृह के निवासियों से संवाद कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा

        झांसी। माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, झांसी कमलेश कच्छल के निर्देशानुसार आज न्यायिक अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा जनपद स्थित अनाथ आश्रम, वृद्धाश्रम एवं शेल्टर होम (आश्रय गृह) का औचक एवं सघन मासिक निरीक्षण किया गया।

        निरीक्षण दल में माननीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश देवाशीष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव/सिविल जज (सी.डि.) मुन्ना लाल तथा किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट अंकिता बौद्ध प्रमुख रूप से शामिल रहे।

       निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने वृद्धाश्रम पहुंचकर वहां निवासरत वृद्धजनों से आत्मीय संवाद किया तथा उनके स्वास्थ्य, खान-पान, आवासीय व्यवस्था एवं नियमित चिकित्सीय जांच के संबंध में जानकारी प्राप्त की। प्रभारी सचिव श्री मुन्ना लाल ने आश्रम प्रबंधन को निर्देशित किया कि वृद्धजनों की देखभाल में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। साथ ही शासन द्वारा संचालित पेंशन, स्वास्थ्य एवं विधिक सहायता योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र वृद्धजन तक पारदर्शी रूप से पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

      इसके उपरांत संयुक्त टीम द्वारा अनाथ आश्रम एवं शेल्टर होम का भी व्यापक निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने बच्चों एवं आवासियों के शयन कक्ष, भोजनालय, शुद्ध पेयजल व्यवस्था, स्वच्छता तथा प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया।    किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट अंकिता बौद्ध ने बच्चों की शिक्षा, मानसिक विकास, पोषण एवं सुरक्षा मानकों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

       अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री देवाशीष ने प्रबंधन को परिसर में साफ-सफाई, शुद्ध एवं पौष्टिक आहार तथा प्राथमिक चिकित्सा पेटी की अद्यतन उपलब्धता हर समय सुनिश्चित रखने के निर्देश दिए।

उन्होंने आवासियों के आगमन, प्रस्थान एवं स्वास्थ्य से संबंधित रजिस्टरों का नियमित एवं विधिवत रख-रखाव किए जाने पर भी जोर दिया।

       उन्होंने कहा कि यदि किसी भी संवासी को विधिक सहायता अथवा विधिक परामर्श की आवश्यकता हो तो तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को सूचित किया जाए, ताकि पात्र व्यक्ति को समय से निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

      निरीक्षण के दौरान संबंधित संस्थानों के अधीक्षक, प्रशासनिक कर्मचारी एवं विधिक टीम के सदस्य उपस्थित रहे।

Related posts