‘तीन नहीं, 403 पर नजर…’, सपा नहीं उतारेगी तीसरा राज्यसभा उम्मीदवार? अखिलेश यादव के पोस्ट से मिले बड़े संकेत

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी की रणनीति अब बदलती नजर आ रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा, “अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।” उनके इस पोस्ट को राज्यसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सपा अब तीसरी सीट के लिए उम्मीदवार नहीं उतारेगी और उसका पूरा फोकस आगामी विधानसभा चुनाव पर रहेगा।

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के वोट की जरूरत है। मौजूदा समय में विधानसभा की प्रभावी संख्या 396 है और सपा के पास 98 विधायक हैं। जेल में बंद रमाकांत यादव को वोटिंग की अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में यह संख्या 97 रह सकती है। कांग्रेस के दो विधायकों का समर्थन मिलने पर सपा के पास 99 वोट हो सकते हैं। ऐसे में दो राज्यसभा सीटों के लिए जरूरी 74 वोट उसके पास आसानी से हैं।

तीसरी सीट के लिए चाहिए 111 वोट

अगर सपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो तीनों सीटें जीतने के लिए 111 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत होगी। दो सीटें जीतने के बाद सपा के पास करीब 25 वोट बचेंगे। ऐसे में तीसरी सीट के लिए उसे कम से कम 12 और विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ती।

इसी संख्या को पूरा करने के लिए सपा की नजर विपक्षी और तटस्थ विधायकों पर थी। सुभासपा के तीन ऐसे विधायकों से समर्थन की उम्मीद जताई जा रही थी, जिनकी पृष्ठभूमि सपा से जुड़ी रही है। इसके अलावा सपा के कुछ बागी विधायकों के वापस आने की भी चर्चा थी।

आरएलडी, अपना दल और कुछ अन्य गैर-बीजेपी विधायकों के रुख पर भी सपा की नजर थी। हालांकि, तीसरे उम्मीदवार के लिए जरूरी संख्या जुटाना पार्टी के सामने बड़ी चुनौती थी।

अखिलेश के एक पोस्ट से बदले सियासी संकेत

अखिलेश यादव पहले कह चुके हैं कि सपा तीसरा उम्मीदवार तभी उतारेगी, जब उसके पास जीत के लिए जरूरी संख्या पूरी होगी। अब उनके “तीन नहीं, चार सौ तीन” वाले पोस्ट ने राज्यसभा चुनाव को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

इस पोस्ट से संकेत मिल रहे हैं कि सपा तीसरी राज्यसभा सीट की दौड़ से पीछे हट सकती है। ऐसे में पार्टी की रणनीति फिलहाल दो राज्यसभा सीटों तक सीमित होती दिखाई दे रही है।

अब 403 विधानसभा सीटों पर फोकस?

अखिलेश यादव के पोस्ट में 403 का जिक्र उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल सीटों की ओर इशारा करता है। ऐसे में उनके संदेश को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

फिलहाल सपा के दो उम्मीदवार राज्यसभा चुनाव के मैदान में हैं। तीसरे उम्मीदवार को लेकर नामांकन की अंतिम तारीख पर तस्वीर साफ होगी। अगर सपा तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारती है तो मुकाबले का गणित भी उसी हिसाब से बदल जाएगा।

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