हिमाचल में घटेगा IAS-IPS कैडर? सुक्खू सरकार का बड़ा प्लान, 200 करोड़ रुपये सालाना बचत का दावा

शिमला: हिमाचल प्रदेश में अधिकारियों की संख्या और प्रशासनिक खर्च को लेकर सुक्खू सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। राज्य सरकार ने सिविल सेवकों के स्वीकृत पदों की संख्या कम करने का प्रस्ताव तैयार किया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि कैडर छोटा करने से राज्य को हर साल करीब 200 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक कैडर की समीक्षा पूरी हो चुकी है और प्रस्ताव मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया है।

हिमाचल में IAS, IPS और IFS के कितने पद

हिमाचल प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा के 153, भारतीय पुलिस सेवा के 96 और भारतीय वन सेवा के 118 स्वीकृत पद हैं। करीब 70 लाख की आबादी वाले राज्य में हर 10 लाख लोगों पर लगभग 21.8 IAS, 13.7 IPS और 16.8 IFS अधिकारी हैं।

पड़ोसी राज्यों से तुलना करें तो हिमाचल में अधिकारियों का अनुपात अधिक है। करीब 1.2 करोड़ आबादी वाले उत्तराखंड में 126 IAS, 75 IPS और 112 IFS के स्वीकृत पद हैं। वहीं करीब 3.14 करोड़ आबादी वाले पंजाब में 231 IAS, 172 IPS और 61 IFS पद हैं।

IAS की संख्या 100 से 110 करने की थी योजना

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि मौजूदा समय में हिमाचल को इतने अधिकारियों की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक कई अधिकारियों के पास अपेक्षाकृत कम काम है और उनकी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

सुक्खू ने बताया कि वह व्यक्तिगत रूप से IAS के स्वीकृत पदों की संख्या घटाकर करीब 100 से 110 करना चाहते थे। हालांकि, कुछ IAS अधिकारियों में नाराजगी की आशंका को देखते हुए सरकार फिलहाल यह संख्या करीब 130 रखने पर विचार कर रही है।

कर्ज और बढ़ते खर्च के बीच सरकार का फैसला

कैडर घटाने का प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब हिमाचल प्रदेश भारी कर्ज और बढ़ते प्रशासनिक खर्च के दबाव में है। राज्य के संसाधनों का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और कर्ज की अदायगी में खर्च हो रहा है। इसके कारण विकास और पूंजीगत कार्यों के लिए सीमित राशि बच रही है।

वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कैडर छोटा करने से निश्चित तौर पर कुछ बचत होगी। हालांकि, उन्हें 200 करोड़ रुपये की बचत के अनुमान की विस्तृत गणना की जानकारी नहीं थी। कार्मिक विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक भी 200 करोड़ रुपये की बचत तुरंत नहीं होगी, बल्कि इसका असर लंबे समय में दिखाई देगा।

केंद्र की मंजूरी के बाद ही घटेगा कैडर

अखिल भारतीय सेवाओं के कैडर में स्वीकृत पदों की संख्या कम करने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होगी। यह प्रक्रिया केंद्र की कैडर समीक्षा व्यवस्था के तहत होती है।

राज्य सरकार अधिकारियों को केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार अब ऐसी फाइलों को रोक नहीं रही है। हिमाचल कैडर के 25 IAS अधिकारी फिलहाल केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर हैं। इनके अलावा 24 IPS और 17 IFS अधिकारी भी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर हैं।

सरकारी गाड़ियों की संख्या भी घटाने की तैयारी

सुक्खू सरकार प्रशासनिक खर्च कम करने के लिए फील्ड अधिकारियों को मिलने वाली सरकारी गाड़ियों की संख्या घटाने पर भी विचार कर रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक इनकी संख्या 56 से घटाकर 30 की जा सकती है।

इसके साथ ही सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक खर्च को नियंत्रित करने के साथ उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है।

बीजेपी ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल

बीजेपी विधायक राकेश जमवाल ने कैडर कम करने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि IAS और IPS के पदों की संख्या घटाने से राज्य की आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

जमवाल ने सवाल किया कि अगर मुख्यमंत्री के मुताबिक अधिकारियों के पास पर्याप्त काम नहीं है, तो बड़ी संख्या में अधिकारी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने की कोशिश क्यों कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से अधिकारियों की क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल नहीं किए जाने को लेकर भी जवाब मांगा।

एक लाख करोड़ रुपये पार कर चुका है हिमाचल का कर्ज

हिमाचल प्रदेश का कुल बकाया कर्ज एक लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है। वेतन, पेंशन और कर्ज की अदायगी पर होने वाला खर्च राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा रहा है।

2025-26 के बजट में सरकार के आंकड़ों के मुताबिक हर 100 रुपये में करीब 25 रुपये वेतन, 20 रुपये पेंशन, 12 रुपये ब्याज और 10 रुपये कर्ज चुकाने पर खर्च होते हैं। इसके अलावा 9 रुपये स्वायत्त संस्थाओं को अनुदान के रूप में दिए जाते हैं। इस हिसाब से करीब 24 रुपये ही विकास और अन्य कार्यों, जिसमें पूंजीगत खर्च भी शामिल है, के लिए बचते हैं।

राजस्व घाटा अनुदान घटने से बढ़ी चुनौती

राज्य की वित्तीय स्थिति पर राजस्व घाटा अनुदान में कमी का भी असर पड़ा है। 15वें वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार राजस्व घाटा अनुदान 2024-25 में 6,258 करोड़ रुपये से घटकर 2025-26 में 3,257 करोड़ रुपये रह गया।

वहीं, जीएसटी मुआवजा जून 2022 में समाप्त हो चुका है। राज्य की अपनी आय जरूरी खर्चों के बीच पैदा हो रहे अंतर को पूरी तरह भरने में सक्षम नहीं है। ऐसे में सरकार के सामने खर्च कम करने, अतिरिक्त कर्ज लेने और राजस्व बढ़ाने के विकल्पों पर काम करने की चुनौती बनी हुई है।

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