नई दिल्ली: भारत और कनाडा के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर बातचीत तेज हो गई है। इस प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 8.4 अरब डॉलर से बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
भारत-कनाडा व्यापार समझौते पर बढ़ी सहमति
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी है कि भारत जल्द ही एक विकसित देश कनाडा के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस समझौते को लेकर अब तक दो चरण की वार्ता पूरी हो चुकी है और आगे की बातचीत को गति देने के लिए वे 25 से 27 मई के बीच कनाडा का दौरा करेंगे।
इस दौरे के दौरान उनके साथ करीब 150 भारतीय उद्योगपति भी मौजूद रहेंगे, जो कनाडाई कंपनियों के साथ निवेश और व्यापार संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।
ऊर्जा और खनिज क्षेत्र में बड़ा लाभ
प्रस्तावित समझौते के तहत भारत को कनाडा से तेल, प्राकृतिक गैस, क्रिटिकल मिनरल्स और यूरेनियम की खरीद में सुविधा मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए यूरेनियम की आपूर्ति इस डील का अहम हिस्सा मानी जा रही है।
कनाडा वर्तमान में ऊर्जा और खनिज संसाधनों का बड़ा उत्पादक देश है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को मजबूती मिलने की संभावना है।
भारत के निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
इस समझौते के जरिए भारत के टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वैलरी, लेदर उत्पाद, इंजीनियरिंग गुड्स और फार्मा सेक्टर के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। ये सभी क्षेत्र रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभाते हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिल सकता है।
कनाडा में भारतीय समुदाय और व्यापारिक अवसर
कनाडा में पहले से ही 600 से अधिक भारतीय कंपनियां सक्रिय हैं और इस संख्या को बढ़ाकर 1000 तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा कनाडा में चार लाख से अधिक भारतीय छात्र भी पढ़ाई कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सामाजिक और आर्थिक संबंध और मजबूत हो रहे हैं।
आर्थिक साझेदारी को नई दिशा
कनाडा, जिसकी अर्थव्यवस्था लगभग 2.4 ट्रिलियन डॉलर की है और जहां प्रति व्यक्ति आय 60,000 डॉलर से अधिक है, भारत के लिए एक बड़ा व्यापारिक अवसर माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच यह प्रस्तावित समझौता रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
