नाम लेना भूल गए जयशंकर… और मंच छोड़कर चली गईं BJP उम्मीदवार

संजीव पॉल
संजीव पॉल

चुनावी मंच पर सब कुछ स्क्रिप्टेड होता है—लेकिन कभी-कभी एक छोटी सी चूक बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर देती है। केरल के वट्टियूरकावु में ऐसा ही हुआ, जब एक नाम छूट गया… और मंच पर सन्नाटा छा गया। सवाल अब यह है—क्या यह सिर्फ भूल थी या चुनावी समीकरणों का संकेत?

 रैली में क्या हुआ?

केरल के वट्टियूरकावु विधानसभा क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री S. Jaishankar की चुनावी सभा के दौरान अचानक अजीब स्थिति बन गई। अपने भाषण में उन्होंने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष Rajeev Chandrasekhar का जिक्र तो किया, लेकिन स्थानीय उम्मीदवार R Srelekha का नाम लेना भूल गए। बस यही वह पल था, जिसने पूरे कार्यक्रम का मूड बदल दिया।

नाराज़गी का विस्फोट

नाम न लिए जाने से आहत R Srelekha ने इसे अपनी उपेक्षा माना और बिना कुछ कहे मंच छोड़कर चली गईं। अचानक हुए इस घटनाक्रम से मंच पर मौजूद नेता और नीचे बैठे कार्यकर्ता दोनों हैरान रह गए। यह सिर्फ एक व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं थी—यह उस असंतोष की झलक थी जो अक्सर चुनावी मंचों के पीछे छिपा रहता है।

अंदर की कहानी क्या कहती है?

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मामला सिर्फ नाम भूलने का नहीं था। श्रीलेखा इस बात से ज्यादा नाराज़ थीं कि पड़ोसी क्षेत्र के उम्मीदवार का नाम लिया गया, लेकिन उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने अपनी शिकायत सीधे Rajeev Chandrasekhar और स्थानीय नेताओं के सामने रखी। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर वरिष्ठ नेता G Soman से भी उनकी तीखी बातचीत हुई।

डैमेज कंट्रोल: कैसे लौटीं मंच पर?

स्थिति बिगड़ती देख पार्टी के बड़े नेताओं ने तुरंत हस्तक्षेप किया। काफी समझाने-बुझाने के बाद R Srelekha को वापस मंच पर लाया गया, जिसके बाद कार्यक्रम सामान्य हो सका। लेकिन तब तक यह घटना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन चुकी थी।

त्रिकोणीय मुकाबले में बढ़ी हलचल

वट्टियूरकावु सीट इस बार बेहद दिलचस्प बन चुकी है। यहां R Srelekha का मुकाबला कांग्रेस के K Muraleedharan और वामपंथी उम्मीदवार V K Prasanth से है। ऐसे में यह छोटा सा विवाद भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

चुनावी माहौल और बढ़ती गर्मी

केरल में 140 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 9 अप्रैल को होना है। लगभग 2.7 करोड़ मतदाता 890 उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे। चुनाव प्रचार अपने चरम पर है और हर पार्टी पूरी ताकत झोंक रही है। ऐसे समय में इस तरह की घटनाएं पार्टी की रणनीति और आंतरिक तालमेल पर सवाल खड़े कर देती हैं।

वार-पलटवार का दौर तेज

प्रचार के आखिरी चरण में कांग्रेस, बीजेपी और वाम मोर्चे के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। जहां एलडीएफ अपनी उपलब्धियां गिना रहा है, वहीं कांग्रेस बीजेपी और वाम दलों के बीच कथित समझौते का आरोप लगा रही है। इस पूरे माहौल में यह घटना बीजेपी के लिए थोड़ी असहज स्थिति जरूर पैदा करती दिख रही है।

एक नाम का छूटना… और पूरा मंच हिल गया। R Srelekha की नाराज़गी ने यह साफ कर दिया कि चुनाव सिर्फ भाषणों से नहीं, बल्कि सम्मान और संतुलन से भी जीते जाते हैं। अब देखना यह है कि यह ‘छोटी चूक’ वोटिंग के दिन कितना बड़ा असर डालती है।

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