
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने केरल विधानसभा चुनावों की रणनीति पर चर्चा के लिए बुलाई गई हाई कमान मीटिंग में शामिल होने से इनकार कर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे वक्त पर सामने आया है, जब कांग्रेस केरल में विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व कर रही है और हर रणनीतिक बैठक अहम मानी जा रही है।
Why Is Shashi Tharoor Upset?
सूत्रों के मुताबिक, थरूर की नाराजगी की जड़ कोच्चि में आयोजित महापंचायत कार्यक्रम है, जिसमें राहुल गांधी भी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि बैठने की व्यवस्था, वक्ताओं का शेड्यूल और वरिष्ठता का सम्मान इन तीनों मोर्चों पर protocol mismanagement हुआ, जिसने थरूर को असहज किया।
“Pattern of Being Ignored”
रिपोर्ट्स के अनुसार, थरूर ने अपने करीबी सहयोगियों से कहा है कि यह कोई isolated incident नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर उनकी seniority और contribution को नजरअंदाज करने का एक pattern है।
राजनीति में जहां symbolism भी message देता है, वहां seating arrangement तक का मतलब निकाला जाता है — और यही चूक भारी पड़ती दिख रही है।
Party Discipline vs Coordination Debate
इस घटना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या पार्टी के भीतर coordination gap बढ़ रहा है?
चुनाव से पहले इस तरह की internal discomfort विपक्षी दलों को अप्रत्यक्ष लाभ दे सकती है।

Meet Skip, But Literature First
दिलचस्प बात यह है कि थरूर ने राजनीतिक मीटिंग से दूरी जरूर बनाई, लेकिन वे Kerala Literature Festival में शिरकत करेंगे।
यह साफ संकेत देता है कि सार्वजनिक और बौद्धिक प्रतिबद्धताएं कायम हैं लेकिन political messaging फिलहाल silent mode में है।
कांग्रेस में अक्सर कहा जाता है — “Experience matters” लेकिन ground reality में कई बार experience सिर्फ bio-data तक सिमट जाता है। और जब सीनियर नेता चुप हो जाए, तो शोर अपने-आप सुनाई देने लगता है।
Official Silence Continues
अब तक कांग्रेस पार्टी की ओर से थरूर की नाराजगी या मीटिंग में उनकी गैर-हाजिरी पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
Kerala elections जैसे high-stakes battle में यह चुप्पी भी कई सवाल छोड़ती है।
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