
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे गांव की राजनीति में फाइलें खुल रही हैं, शिकायतें बोलने लगी हैं और प्रशासन भी अब silent mode में नहीं दिख रहा।
Bareilly जिले में ग्राम प्रधानों के खिलाफ हुई कार्रवाई सिर्फ एक administrative exercise नहीं, बल्कि यह साफ संकेत है कि चुनावी साल में ‘सब चलता है’ वाला दौर फिलहाल Pause पर है।
80 से ज्यादा शिकायतें, गांव-गांव से आई ‘आरोपों की फाइल’
DM Office तक 46 ग्राम प्रधानों के खिलाफ 80+ complaints पहुंचीं। शिकायतों की लिस्ट लंबी थी और आरोप भी भारी— नाली, खड़ंजा और CC रोड में कागज़ी विकास। बिना काम कराए payment clearance, अपने रिश्तेदारों के खातों में सरकारी पैसा ट्रांसफर। एक ही काम के लिए multiple heads से fund withdrawal यानि गांव में सड़क कम बनी, लेकिन फाइलें पूरी पक्की।
जांच हुई… और ‘All Equal’ नहीं निकले सब
DM के निर्देश पर सभी शिकायतों की जांच कराई गई। नतीजा साफ रहा— 36 ग्राम प्रधानों को Clean Chit, 10 प्रधान Suspend
यहां प्रशासन ने यह भी दिखाया कि “शिकायत आई है तो कार्रवाई होगी, पर सिर्फ आरोप पर फैसला नहीं।”
इन 10 प्रधानों पर गिरी गाज
जिन ग्राम पंचायतों में आरोप सही पाए गए, वहां Suspension का आदेश हुआ— बराथानपुर, खमरिया, भोजपुर, सकरस, बेहटा बुजुर्ग,
मरगापुर, चकदहा, बल्लिया, लीलौर सहसा और लीलौर बुजुर्ग।
इन मामलों में प्रशासन का कहना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग के पर्याप्त सबूत मिले।
36 प्रधानों को राहत, राजनीति को झटका
दूसरी ओर कई ग्राम पंचायतों— जैसे पिंदारी, उगनपुर, जाम, जसाई नागर, पंडरी, केसरपुर, सुल्तानपुर, हल्दी कला, मोहम्मदपुर, परेवा, लभेड़ा, रूपपुर, रिचौला, नवदिया, बरखना, बड़ागांव, परसरामपुर, लौंगपुर, चंपतपुर, शेखापुर, मण्डौरा, और अन्य—में लगे आरोप जांच में निराधार निकले।

इन प्रधानों को Clean Chit मिली, जिससे यह साफ हुआ कि हर शिकायत चुनावी सियासत नहीं, लेकिन हर शिकायत को चुनावी साजिश भी नहीं कहा जा सकता।
शिकायतें अचानक क्यों बढ़ीं? Election Effect
DPRO कमल किशोर का साफ कहना है— “इस साल पंचायत चुनाव हैं, इसी वजह से शिकायतों की संख्या बढ़ी है। हर शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई गई।”
साफ है—चुनाव आते ही गांवों में वोटर से पहले फाइलें एक्टिव हो जाती हैं।
सियासी संकेत साफ: अब ‘गांव’ भी नजर में
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह कार्रवाई सिर्फ Bareilly तक सीमित नहीं रहेगी। पंचायत चुनाव से पहले प्रशासन यह संदेश देना चाहता है कि— Development सिर्फ बोर्ड पर नहीं चलेगा, Accounts अब सवालों से बाहर नहीं और सत्ता गांव से शुरू होती है, तो जवाबदेही भी वहीं से होगी।
Bareilly में 10 ग्राम प्रधानों का सस्पेंशन कोई छोटी खबर नहीं, बल्कि यह चुनावी साल का Power Signal है। अब सवाल यह नहीं कि
कौन Suspend हुआ और कौन बच गया— सवाल यह है कि क्या यह सख्ती मतदान तक टिकेगी या चुनाव बाद फिर फाइलें सो जाएंगी?
गांव की राजनीति हमेशा शांत दिखती है, पर चुनाव आते ही यही सबसे ज़्यादा शोर करती है।
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