नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस 2026 के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘शक्ति की सप्तधारा’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगले पांच से सात साल में भारत वह हासिल करेगा, जो पिछले पांच से सात दशकों में हासिल नहीं हो सका। पीएम मोदी ने कहा कि सप्तधारा की ताकत के जरिए देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने, विकास की रफ्तार बढ़ाने और नए लक्ष्य हासिल करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता का इस्तेमाल विकसित भारत के निर्माण में करने की बात भी कही।
सप्तधारा में शामिल हैं ये सात प्रमुख ताकतें
प्रधानमंत्री मोदी ने सप्तधारा की पहली ताकत मैन्युफैक्चरिंग पावर को बताया। उन्होंने कहा कि भारत को डिजाइन से लेकर उत्पादन तक पूरी वैल्यू चेन तैयार करनी होगी। देश को दुनिया के लिए भरोसेमंद ग्लोबल सप्लाई चेन पार्टनर के रूप में स्थापित करना होगा। इसके लिए लागत, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता के वैश्विक मानकों तक पहुंचना जरूरी है।
सप्तधारा की दूसरी ताकत खेती और खाद्य उत्पादन है। पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक बाजार खुल रहे हैं और मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए भारत को बड़े नए बाजारों तक पहुंच मिल रही है। उन्होंने कहा कि भारत के मसाले और बाजरा जैसे उत्पादों को वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करना होगा।
तीसरी ताकत तकनीक और नवाचार है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह रोबोटिक्स, एआई, क्वांटम तकनीक, अंतरिक्ष और डेटा सेंटर का दौर है। नई तकनीकें नई चुनौतियां भी सामने ला रही हैं और भारत को नवाचार का वैश्विक केंद्र बनना होगा। उन्होंने कहा कि यूपीआई और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के जरिए भारत अपनी क्षमता पहले ही दिखा चुका है। अब अगली पीढ़ी की संचार तकनीक में भी अगला बड़ा कदम उठाना होगा।
सप्तधारा की चौथी ताकत गति-शक्ति है। पीएम मोदी ने इसे देश में बिना रुकावट तेज कनेक्टिविटी से जोड़ते हुए हाई-स्पीड रेल, आधुनिक हाईवे, अंतर्देशीय जलमार्ग, एयरपोर्ट, बहु-माध्यम लॉजिस्टिक्स हब और बंदरगाहों के विकास पर जोर दिया। उन्होंने बंदरगाह आधारित विकास की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।
पांचवीं ताकत रक्षा उत्पादन है। प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनना होगा और देश को वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनाने का लक्ष्य रखना होगा।
सप्तधारा की छठी ताकत हरित और नीली अर्थव्यवस्था है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना चाहिए। इसके साथ ही भारत को वैश्विक चुनौतियों के समाधान देने का प्रयास भी जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि नीली अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन और समुद्री तकनीक के क्षेत्र में कई अवसर मौजूद हैं, जो देश की आर्थिक वृद्धि के लिए नए रास्ते खोल सकते हैं।
सप्तधारा की सातवीं ताकत भारत की सॉफ्ट पावर है। प्रधानमंत्री ने योग का उदाहरण देते हुए कहा कि योग ने पूरी दुनिया को भारत से जोड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा कि योग दुनिया के लिए ऊर्जा और भारत के लिए विश्वास का बड़ा आधार बनता जा रहा है।
युवाओं की क्षमता का पूरी तरह इस्तेमाल करने पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि सप्तधारा की ताकत और क्षमता के साथ भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं की अपार क्षमता का देश के निर्माण में पूरी तरह इस्तेमाल किया जाएगा। उनकी ऊर्जा, प्रतिभा और ताकत को एकजुट करके मजबूत और ज्यादा विकसित भारत के निर्माण की दिशा में लगाया जाएगा।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने युवाओं के लिए एआई प्रशिक्षण और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की बात भी कही।
परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के कलपक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने इस वर्ष क्रिटिकलिटी हासिल की है।
पीएम मोदी ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा आज की जरूरत है और इसमें परमाणु ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि पांच नए परमाणु रिएक्टर स्थापित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद में ‘शांति’ अधिनियम पारित किया गया है और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
