
पश्चिम बंगाल में वोटिंग सिर्फ चुनाव नहीं होती… यह ताकत, सियासत और सड़क की नब्ज़ का इम्तिहान भी होती है। 2026 के दूसरे और अंतिम चरण में 3 बजे तक 78.68% मतदान ने रिकॉर्ड जैसी तस्वीर पेश की, लेकिन दूसरी तरफ बूथों पर झड़प, लाठीचार्ज, EVM विवाद और आरोपों ने माहौल फिर गरमा दिया।
3 बजे तक 78.68% मतदान, बंगाल में भारी उत्साह
West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण में दोपहर 3 बजे तक 78.68% वोटिंग दर्ज की गई। मतदान केंद्रों पर सुबह से लंबी कतारें दिखीं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी सीटों तक लोगों ने बड़ी संख्या में वोट डाला। यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि बंगाल की जनता इस चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है।
जिलों में कैसी रही वोटिंग?
दोपहर 1 बजे तक मिले आंकड़ों के अनुसार:
- कोलकाता नॉर्थ – 60%
- कोलकाता साउथ – 58%
- हावड़ा – 61%
- उत्तर 24 परगना – 59%
- दक्षिण 24 परगना – 59%
- पूर्व बर्दवान – 67%
- नदिया – 61%
- हुगली – 65%
यानी शहरों में steady turnout और जिलों में bumper participation दिखा।
वोटिंग के बीच हिंसा, तनाव और झड़पें
बंगाल चुनाव और तनाव—यह समीकरण फिर दिखा। कई इलाकों से टकराव की खबरें सामने आईं।
हावड़ा में लाठीचार्ज
Howrah के बाली विधानसभा क्षेत्र में EVM खराब होने के आरोप के बाद वोटरों में गुस्सा बढ़ गया। हालात बिगड़ने पर पुलिस और केंद्रीय बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
भवानीपुर में टकराव
Suvendu Adhikari के दौरे के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं से झड़प और नारेबाजी की खबर आई।
भांगड़ में बवाल
TMC और ISF समर्थकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और नारेबाजी ने माहौल तनावपूर्ण बना दिया।
EVM पर सवाल, बूथ प्रबंधन पर विवाद
कुछ क्षेत्रों में EVM के बटन काम न करने की शिकायतें सामने आईं। कई उम्मीदवारों ने बूथ एजेंट्स को बाहर रखने, छोटे मतदान केंद्रों और सुरक्षाकर्मियों के रवैये पर भी सवाल उठाए। चुनाव आयोग पर निगाहें अब और तेज हो गई हैं।
बड़े नेताओं ने भी डाला वोट
Abhishek Banerjee ने मतदान किया और विपक्ष पर निशाना साधा। Chandra Kumar Bose ने भी वोट डालने के बाद कुछ जगहों पर व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए। यह चुनाव सिर्फ सीटों का नहीं, narratives का भी बन गया है।
किसके पक्ष में जाएगा बंपर मतदान?
इतिहास बताता है कि भारी मतदान कई बार सत्ता परिवर्तन का संकेत देता है, लेकिन बंगाल में यह सीधा फॉर्मूला हमेशा लागू नहीं होता।
Trinamool Congress इसे जनता का भरोसा बताएगी। Bharatiya Janata Party इसे बदलाव की लहर कहेगी। Indian National Congress और वाम दल इसे anti-incumbency narrative देंगे। असल जवाब EVM खुलने के बाद ही मिलेगा।
चुनाव का असली संदेश
एक तरफ रिकॉर्ड मतदान, दूसरी तरफ हिंसा और विवाद। बंगाल फिर वही सवाल पूछ रहा है—क्या लोकतंत्र सिर्फ वोट डालने का नाम है, या बिना डर वोट डालने का भी? जब जनता इतनी बड़ी संख्या में बाहर निकली है, तो यह साफ है कि लोगों में उम्मीद अभी जिंदा है।
78.68% मतदान ने बंगाल चुनाव 2026 को हाई-वोल्टेज बना दिया है। लेकिन हिंसा, लाठीचार्ज और विवादों ने जीत की चमक पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर नतीजों पर है—क्या यह वोट सत्ता बचाएगा या सत्ता बदल देगा?
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