लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होम स्टे नीति-2025 को अधिक प्रभावी और हितधारकों के लिए सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से इसकी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में संशोधन किया है। नए प्रावधानों के तहत अब होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों में अधिकतम 8 कमरों तक पंजीकरण कराया जा सकेगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने मंगलवार को संशोधित व्यवस्था की जानकारी दी। संशोधित एसओपी के अनुसार, होम स्टे प्रतिष्ठान में न्यूनतम 1 और अधिकतम 8 कमरे पंजीकृत कराए जा सकेंगे। जिन भवनों में 9…
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अयोध्या से मिर्जापुर तक पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, ‘आपदा में अवसर’ बताकर सरकार ने शुरू किया खास अभियान
लखनऊ: वैश्विक अनिश्चितताओं और बदलते हालात के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को नई रफ्तार देने की तैयारी तेज कर दी है। राज्य सरकार अब घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाने जा रही है। इसी कड़ी में पर्यटन विभाग ने ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। इसके तहत अगले दो महीनों तक सरकारी संग्रहालयों में बच्चों और परिवारों के लिए मुफ्त प्रवेश की सुविधा दी जाएगी। बुधवार को पर्यटन निदेशालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में उत्तर प्रदेश…
Read More“52 लाख का ब्लेड!” — यूपी के रामपुर में खड़ा है दुनिया का सबसे बड़ा चाकू
अगर आपको लगता है कि ‘रामपुरी चाकू’ सिर्फ फिल्मों में दिखता था, तो ज़रा रुकिए। क्योंकि उत्तर प्रदेश के रामपुर शहर में ऐसा असली ‘ब्लेड’ रखा है, जो गिनीज़ बुक में जगह बना सकता है — 6.10 मीटर लंबा, और कीमत 52 लाख रुपये से ज्यादा! ‘City of Knives’ — रामपुर की पहचान रामपुर को यूं ही ‘City of Knives’ नहीं कहा जाता। यहां 18वीं शताब्दी से चाकू बन रहे हैं — वो भी ऐसे जिनमें नक्काशी, शाही डिज़ाइन और हाथी के दांत जैसे मटेरियल का इस्तेमाल होता है। एक…
Read Moreसाहेबान! लखनऊ अब UNESCO का ‘Creative City of Gastronomy’
भारत की तहज़ीब और ज़ायके का दिल — लखनऊ — अब वैश्विक मंच पर चमक उठा है। UNESCO ने इसे Creative City of Gastronomy का दर्जा दिया है, यानी अब नवाबी शहर की बिरयानी, कबाब और पराठे सिर्फ़ भारत नहीं, दुनिया के स्वाद का हिस्सा बन गए हैं। UNESCO ने क्यों दिया यह सम्मान? लखनऊ के खानपान में सिर्फ़ स्वाद नहीं, बल्कि सदियों की संस्कृति, सूफियाना तहज़ीब और गंगा-जमुनी विरासत का मेल है। इस मान्यता के साथ, लखनऊ अब 50 से अधिक देशों के “UNESCO Creative Cities Network” का हिस्सा…
Read More111 साल बाद भी “चारबाग स्टेशन से ट्रेनें भी फुसफुसा के निकलती हैं!”
लखनऊ का चारबाग स्टेशन सिर्फ ट्रेन पकड़ने की जगह नहीं, यह एक जीती-जागती म्यूज़ियम है।1914 में बिशप जॉर्ज हर्बर्ट ने इसकी नींव रखी और जब 1923 में बनकर तैयार हुआ, तो अंग्रेजों ने कहा—”अब भारतीयों को छांव तो मिल गई, लेकिन सीट नहीं!”9 साल लगे इसे बनाने में, और 70 लाख रुपये खर्च हुए (जो उस वक्त का “रेल बजट” ही था!)। बिना आवाज़ वाली ट्रेनें—जादू नहीं, आर्किटेक्चर है! चारबाग स्टेशन की सबसे दिलचस्प बात ये है कि ट्रेन की आवाज़ बाहर नहीं आती। क्यों? क्योंकि इसका आर्किटेक्ट ऐसा था…
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