जंग की आग अभी बुझी भी नहीं… और बाजार जश्न मनाने लगा। जहां मिसाइलें थमीं… वहां पैसों की बारिश शुरू हो गई। लेकिन सवाल ये है—ये राहत असली है या तूफान से पहले की शांति? मार्केट की मुस्कान अक्सर सबसे खतरनाक संकेत होती है। बाजार में धमाका: 3% की ताबड़तोड़ छलांग खुलते ही भारतीय शेयर बाजार ने ऐसा छलांग मारी जैसे दबा हुआ स्प्रिंग अचानक खुल गया हो। BSE Sensex 2674 अंकों की उछाल के साथ 77,000 के पार पहुंच गया, जबकि Nifty 50 23,800 के ऊपर निकल गया। ये सिर्फ…
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जंग का डर… फिर भी ‘रॉकेट’ बना रुपया! RBI के एक वार से डॉलर हुआ ढेर
दुनिया इस वक्त बारूद की गंध में सांस ले रही है। मिडिल ईस्ट में जंग की लपटें, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें और ग्लोबल मार्केट्स का डगमगाता संतुलन—हर तरफ डर का माहौल है। लेकिन इसी अंधेरे के बीच भारत से एक ऐसी खबर आई जिसने पूरी आर्थिक दुनिया को चौंका दिया। 2 अप्रैल 2026… यह तारीख अब सिर्फ कैलेंडर का हिस्सा नहीं रही, बल्कि भारतीय रुपये की “कमबैक स्टोरी” बन गई है। जहां एक तरफ डॉलर अपनी मसल पावर दिखा रहा था, वहीं भारतीय रुपया अचानक ‘अंडरडॉग’ से ‘चैंपियन’…
Read Moreभारत में ट्रेडिंग और निवेश: क्या अब निवेश करना सही है? ट्रंप के वैश्विक प्रभाव का विश्लेषण
आज के वैश्विक माहौल में, जहाँ एक तरफ पूरी दुनिया ट्रंप की नीतियों से प्रभावित है, वहीं भारत में ट्रेडिंग और निवेश के संभावनाओं के बारे में सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या इस समय निवेश करना चाहिए या फिर बेहतर होगा कि हम कुछ समय और इंतजार करें? हम भारतीय बाजार की वर्तमान स्थिति, वैश्विक अनिश्चितता, और क्या इस समय निवेश करना समझदारी होगी, इसका विश्लेषण करेंगे। You may also like:आरी की धार अब लखनऊ नहीं सह पाता: जरदोजी कारीगरों का पलायन सरकार की चुप्पी वैश्विक संकट: ट्रंप की नीतियों…
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