वॉशिंगटन: अमेरिका में रूस के खिलाफ प्रस्तावित नए प्रतिबंध कानून ने भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी सीनेट ने रूस से जुड़े प्रतिबंध विधेयक को आगे की प्रक्रिया के लिए मंजूरी दे दी है। यदि यह विधेयक कानून का रूप लेता है, तो भारत सहित रूस से ऊर्जा खरीदने वाले कुछ देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने की संभावना बन सकती है। इस घटनाक्रम ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी…
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चीन के लिए निकले रूसी टैंकर भारत मुड़े, तेल की जंग में नया ‘खेल’ शुरू
समंदर इस वक्त सिर्फ पानी नहीं… राजनीति से भरा हुआ बारूद है। जहाँ कल तक चीन की ओर बढ़ रहे रूसी तेल टैंकर आज अचानक दिशा बदलकर भारत की तरफ मुड़ गए हैं।यह कोई नेविगेशन एरर नहीं—यह एक geopolitical U-turn है, जिसने बीजिंग से लेकर वॉशिंगटन तक बेचैनी फैला दी है। रूसी टैंकरों का ‘यू-टर्न’ — समुद्र में बदल गया खेल दक्षिण चीन सागर में अचानक सात बड़े रूसी ऑयल टैंकरों का रास्ता बदलना सिर्फ एक लॉजिस्टिक फैसला नहीं है।यह साफ संकेत है कि ऊर्जा की जंग अब खुलेआम खेली…
Read More“EU का तेल बम! भारत की 3 कंपनियां ब्लैकलिस्ट — रूस बना टेंशन!”
अमेरिका के बाद अब यूरोपियन यूनियन ने भी भारत को सख्त मेसेज भेज दिया है — “रूस से तेल खरीदोगे तो झेलोगे!”रूस से कनेक्शन रखने के आरोप में EU ने भारत की तीन कंपनियों पर प्रतिबंध जड़ दिए हैं। ये वही कंपनियाँ हैं जो रूस के साथ तेल और टेक्नोलॉजी ट्रेड में जुड़ी बताई जा रही हैं।यानी अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया इशारा साफ है — “जो रूस का यार है, वो EU का प्यार नहीं पा सकता!” तीन भारतीय कंपनियाँ EU की ब्लैकलिस्ट में – नाम सुनिए ध्यान से!…
Read Moreक्या भारत बन गया है रूस के फाइटर जेट्स का “फ्यूल सप्लायर”?
एक नई यूरोपीय रिपोर्ट ने भारत को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। वजह? रूस-यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल हो रहे लड़ाकू विमानों की परफॉर्मेंस बढ़ाने वाले Fuel Additives का “मुख्य सप्लायर” बन चुका है भारत। अब भले ही भारत कहे कि हम तटस्थ हैं, लेकिन रिपोर्ट्स कुछ और ही कह रही हैं – Made in India केमिकल्स, Made for Peace या Made for Putin? क्या हैं ये Fuel Additives? युद्ध के मासूम “सहयोगी” या परफॉर्मेंस बूस्टर? फ्यूल एडिटिव्स कोई मिसाइल या बम नहीं होते। ये तो वो केमिकल होते…
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