रेट्रो रिव्यू: ‘बंदिनी’ — एक कैदी नहीं, एक चीख है जो आज भी सुनाई देती है

1963 का सिनेमा अगर आपको सिर्फ ब्लैक एंड व्हाइट फ्रेम्स लगता है, तो Bandini आपको झकझोर देगा। ये फिल्म कोई कहानी नहीं सुनाती, ये सीधे आपके अंदर उतरती है। Bimal Roy ने यहां सिनेमा नहीं बनाया, बल्कि समाज का एक्स-रे कर दिया। और उस एक्स-रे में सबसे बड़ा फ्रैक्चर दिखता है — एक औरत का टूटा हुआ अस्तित्व। कल्याणी: एक नाम नहीं, एक जख्म है कल्याणी, जिसे Nutan ने निभाया, वो सिर्फ एक किरदार नहीं है — वो हर उस औरत की आवाज है जिसे समाज ने पहले इस्तेमाल किया,…

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बच्चों ने ‘इज्जत’ कमाई—Boot Polish आज भी सिस्टम को आईना दिखाती है

1954… सिनेमा रंगीन नहीं था, लेकिन दर्द बहुत गहरा था। सड़क किनारे बैठे दो बच्चे…एक के हाथ में ब्रश, दूसरे की आंखों में भूख। Boot Polish सिर्फ एक फिल्म नहीं है—ये उस भारत की तस्वीर है, जहां “भीख” और “मेहनत” के बीच रोज जंग होती थी… और आज भी होती है। कहानी: जब पेट और स्वाभिमान आमने-सामने खड़े हो जाएं भोला और बेलू—दो बच्चे, जिनके पास ना माँ है, ना बाप का सहारा। बचा क्या? एक क्रूर चाची और सड़कों की धूल। भीख मांगना उनकी मजबूरी बना दिया जाता है।…

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“हवेली, भूत और मोहब्बत का ब्लैक-एंड-व्हाइट जादू: 1949 की ‘महल’

आज के जमाने में हॉरर फिल्म का मतलब होता है तेज़ बैकग्राउंड म्यूज़िक, अचानक कूदता हुआ भूत और दर्शक की चीख. लेकिन 1949 में बनी महल ने डर को अलग अंदाज़ में परोसा. यहां डर चीखता नहीं, फुसफुसाता है. बॉम्बे टॉकीज़ के स्टूडियो में सीमित बजट, अनिश्चित भविष्य और आधा-अधूरा भरोसा लेकर बनी यह फिल्म रिलीज़ के बाद ऐसा धमाका कर गई कि उस दौर के आलोचक भी सिर खुजलाते रह गए. कहानी भूत की कम और मोहब्बत की ज्यादा है. मगर मोहब्बत ऐसी जो मौत, जन्म और समय की…

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अमर अकबर एंथनी रिव्यू: तीन धर्म, एक मां और मसाले का महाकाव्य!

1977 की “अमर अकबर एंथनी” कोई फिल्म नहीं, बल्कि एक सिने-संविधान था, जिसमें धर्मनिरपेक्षता को मसाले के साथ परोसा गया था। हिंदू, मुस्लिम और ईसाई – तीनों धर्मों का प्रतिनिधित्व करते हुए तीन भाई अलग-अलग धर्मों में पलते हैं, और फिर बॉलीवुड-लॉजिक की शक्ति से एक हो जाते हैं। Plot Twist? माँ अंधी होती है। बेटा शराब बेचता है। और सबका ब्लड ग्रुप, conveniently, “Emotional+” निकलता है। तीन भाई, तीन करियर — Welcome to Jobs India अमर – पुलिस अफसर; खाकी में धर्म की रक्षा एंथनी – सस्ता रम, महंगी…

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