Dev Anand की वो फिल्म जिसने 1958 में ही सिस्टम का पोस्टमार्टम कर दिया

यह फिल्म नहीं… एक ऐसा केस है जो 1958 में खुला था और आज तक बंद नहीं हुआ। एक बेटा अदालत, पुलिस और सिस्टम से टकराता है—और हर मोड़ पर सच नहीं, “सेटिंग” जीतती दिखती है। “काला पानी” सिर्फ कहानी नहीं, उस दौर का आईना है जहाँ न्याय भी सिफारिश मांगता था। कहानी: बाप जेल में, बेटा सिस्टम से भिड़ा Kala Pani में करण मेहरा (Dev Anand) को बचपन से बताया जाता है कि उसके पिता मर चुके हैं। लेकिन सच्चाई?पिता जिंदा हैं… जेल में और जुर्म? जो उन्होंने किया…

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“हवेली, भूत और मोहब्बत का ब्लैक-एंड-व्हाइट जादू: 1949 की ‘महल’

आज के जमाने में हॉरर फिल्म का मतलब होता है तेज़ बैकग्राउंड म्यूज़िक, अचानक कूदता हुआ भूत और दर्शक की चीख. लेकिन 1949 में बनी महल ने डर को अलग अंदाज़ में परोसा. यहां डर चीखता नहीं, फुसफुसाता है. बॉम्बे टॉकीज़ के स्टूडियो में सीमित बजट, अनिश्चित भविष्य और आधा-अधूरा भरोसा लेकर बनी यह फिल्म रिलीज़ के बाद ऐसा धमाका कर गई कि उस दौर के आलोचक भी सिर खुजलाते रह गए. कहानी भूत की कम और मोहब्बत की ज्यादा है. मगर मोहब्बत ऐसी जो मौत, जन्म और समय की…

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