केवल दो केस से नहीं लगेगा ‘गुंडा’ का ठप्पा, हाई कोर्ट ने रद्द किए प्रशासन के आदेश, दिया बड़ा कानूनी संदेश

लखनऊ: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल दो आपराधिक मुकदमों में नाम आने के आधार पर किसी व्यक्ति को उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970 के तहत गुंडा घोषित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को गुंडा घोषित करने के लिए उसका आदतन अपराधी होना आवश्यक है। एक या दो मामलों में संलिप्तता भर से यह नहीं माना जा सकता कि वह समाज के लिए स्थायी खतरा है।

हाई कोर्ट ने रद्द किए प्रशासन के दोनों आदेश

न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने राहुल उर्फ राहुल सरोज की याचिका स्वीकार करते हुए अमेठी के अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) द्वारा 25 फरवरी को पारित गुंडा घोषित करने के आदेश और अयोध्या मंडल के आयुक्त द्वारा 6 मई को दिए गए अपीलीय आदेश को निरस्त कर दिया।

2021 और 2025 के दो मामलों के आधार पर हुई थी कार्रवाई

याचिकाकर्ता को वर्ष 2021 और वर्ष 2025 में दर्ज दो अलग-अलग आपराधिक मामलों के आधार पर गुंडा घोषित किया गया था। इसके अलावा राज्य प्रशासन ने दो बीट सूचना रिपोर्ट और एक निषेधात्मक रिपोर्ट का भी आधार बनाया था। हालांकि अदालत ने कहा कि इन तथ्यों से यह साबित नहीं होता कि याचिकाकर्ता आदतन अपराधी है या उसकी गतिविधियों से लोक व्यवस्था को वास्तविक खतरा है।

‘आदतन अपराधी’ की अदालत ने स्पष्ट की परिभाषा

खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि ‘आदतन’ शब्द का अर्थ बार-बार, लगातार और समान प्रकृति के अपराध करना है। केवल एक या दो अलग-अलग घटनाओं के आधार पर किसी व्यक्ति को गुंडा घोषित नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि गुंडा नियंत्रण अधिनियम का उद्देश्य आदतन और खतरनाक अपराधियों पर नियंत्रण करना है, न कि सामान्य आपराधिक मामलों के आरोपितों को दंडित करना।

बीट रिपोर्ट को भी नहीं माना पर्याप्त आधार

अदालत ने यह भी माना कि बिना किसी विधिवत शिकायत और जांच के तैयार की गई बीट रिपोर्टों के आधार पर किसी व्यक्ति को गुंडा घोषित करना कानून के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ सामान्य आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है, तो गुंडा नियंत्रण अधिनियम का उपयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने दोनों प्रशासनिक आदेशों को रद्द करते हुए याचिका मंजूर कर ली।

 

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