EVM का ‘पोस्टमार्टम’ LIVE! छेड़छाड़ का सच क्या आज सामने आएगा?

Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

भारतीय लोकतंत्र की सबसे संवेदनशील मशीनें—EVM—आज खुद जांच के कटघरे में खड़ी हैं। Mumbai की चांदीवली सीट पर शुरू हुई यह तकनीकी जांच सिर्फ एक विधानसभा सीट का मामला नहीं, बल्कि पूरे चुनावी सिस्टम की विश्वसनीयता की परीक्षा बन चुकी है। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि कौन जीता—सवाल यह है कि जीत कैसे हुई?

हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू हुई ऐतिहासिक जांच

Bombay High Court के निर्देश के बाद चांदीवली विधानसभा सीट की 20 EVM और VVPAT मशीनों की जांच आज सुबह 9:30 बजे से शुरू हो गई। यह जांच Borivali ईस्ट के एक सुरक्षित सरकारी परिसर में कड़ी निगरानी के बीच हो रही है। बेंगलुरु से Bharat Electronics Limited (BEL) के विशेषज्ञ इंजीनियर पहुंचे। माइक्रोकंट्रोलर और बर्न-मेमोरी की गहराई से जांच। उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रक्रिया।

नसीम खान की याचिका और ‘करीबी हार’ का विवाद

इस पूरे मामले के केंद्र में हैं Naseem Khan, जिन्होंने 2024 के चुनाव परिणाम को चुनौती दी थी। क्या हुआ था? चांदीवली सीट पर बेहद करीबी मुकाबला, Dilip Lande (शिंदे गुट) ने मामूली अंतर से जीत दर्ज की। खान ने EVM में गड़बड़ी का आरोप लगाकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद फरवरी 2026 में कोर्ट ने जांच की अनुमति दी।

क्या पहली बार हो रही है ऐसी जांच?

चुनाव आयोग के अनुसार, यह पूरी तरह “अभूतपूर्व” नहीं है। Election Commission of India ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत 5% मशीनों का सत्यापन संभव है। 2025 में महाराष्ट्र की 17 सीटों पर ऐसी जांच हो चुकी है। लेकिन यह मामला खास क्यों?
क्योंकि यहां जांच कोर्ट के सीधे आदेश और राजनीतिक विवाद के बाद हो रही है।

मशीनों में क्या खोजा जा रहा है?

यह कोई सामान्य जांच नहीं, बल्कि एक “टेक्निकल ऑडिट” है। माइक्रोचिप में किसी बाहरी हस्तक्षेप के संकेत। मेमोरी डेटा में असामान्य बदलाव। वोट रिकॉर्डिंग की सटीकता। अगर ‘टैंपरिंग’ के सबूत मिलते हैं, तो यह मामला सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं रहेगा।

क्या बदल सकता है चुनाव का परिणाम?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोई बड़ी तकनीकी गड़बड़ी सामने आती है तो चुनाव परिणाम को चुनौती मिल सकती है। दोबारा मतगणना या पुनः चुनाव तक की नौबत आ सकती है। और सबसे बड़ा असर—देशभर में EVM की विश्वसनीयता पर नई बहस।

सियासत में क्यों मचा है हड़कंप?

Indian National Congress और खासकर Rahul Gandhi पहले से ही EVM पर सवाल उठाते रहे हैं। अब यह जांच विपक्ष को नया मुद्दा दे सकती है। सत्ता पक्ष को सफाई देने पर मजबूर कर सकती है और चुनावी पारदर्शिता पर बड़ा नैरेटिव सेट कर सकती है।

लोकतंत्र की मशीन, अब खुद कटघरे में

Mumbai के एक सीलबंद कमरे में चल रही यह जांच सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया नहीं—यह भरोसे की जांच है। अगर मशीनें “साफ” निकलती हैं, तो EVM पर उठ रहे सवाल कमजोर होंगे। अगर नहीं… तो भारतीय चुनावी इतिहास का सबसे बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।

फिलहाल, देश की नजरें एक ही जगह टिकी हैं— चांदीवली की उन मशीनों पर, जिनमें शायद ‘लोकतंत्र का सच’ बंद है।

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