लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने के फैसले को लेकर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। मायावती ने सरकार से जनहित को प्राथमिकता देने की बात कही।
UPI शुल्क को लेकर मायावती ने उठाया सवाल
मायावती ने यूपीआई से जुड़े शुल्क को लेकर सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और ऐसे में शुल्क लगाए जाने के फैसले का असर लोगों पर पड़ सकता है। उन्होंने इसे लेकर सरकार से अपनी नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की।
स्मार्ट स्कूलों की योजना पर भी सवाल
मायावती ने उत्तर प्रदेश में स्मार्ट कक्षाओं और आईसीटी लैब से जुड़ी योजना को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही बुनियादी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
करीब 14,500 स्कूलों में स्मार्ट कक्षाओं की तैयारी
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से करीब 14,500 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट कक्षाएं और आईसीटी लैब स्थापित करने की योजना है। इसके लिए करीब 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मायावती ने इस राशि को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रति स्कूल करीब दो लाख रुपये के आसपास की राशि से क्या जरूरी सभी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
छत, फर्नीचर और शौचालय जैसी सुविधाओं पर जोर
मायावती ने कहा कि स्मार्ट शिक्षा की व्यवस्था से पहले सरकारी स्कूलों में छत, बेंच, कुर्सियां, किताबें, शौचालय, खेल मैदान और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में आधुनिक सुविधाओं के साथ आधारभूत जरूरतों पर भी ध्यान देने की बात कही।
जनहित को प्राथमिकता देने की अपील
मायावती ने अपने बयान में सरकार से ऐसे फैसले लेने की अपील की, जिनका सीधा संबंध आम जनता के हित से हो। उन्होंने यूपीआई शुल्क और स्मार्ट स्कूलों की योजना दोनों को लेकर सरकार से सवाल करते हुए जनहित को प्राथमिकता देने की बात कही।
