लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की पहली महिला पत्रकारों में शुमार मेहरू जाफर का गोवा में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पत्रकारिता जगत, सामाजिक क्षेत्र और साहित्यिक समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई। सत्तर के दशक की शुरुआत में पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने वाली मेहरू जाफर ने लंबे समय तक सक्रिय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान बनाई और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर भी लगातार काम किया।
पत्रकारिता के साथ सामाजिक सरोकारों से भी रहीं जुड़ी
मेहरू जाफर केवल एक वरिष्ठ पत्रकार ही नहीं थीं, बल्कि वह एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता और कई पुस्तकों की लेखिका भी थीं। उन्होंने पत्रकारिता के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज कराई और विभिन्न विषयों पर लेखन के माध्यम से भी अपनी अलग पहचान बनाई।
चित्रकूट सम्मेलन के आयोजन में निभाई थी अहम भूमिका
वर्ष 1978 में आयोजित आईएफडब्ल्यूजे के चित्रकूट सम्मेलन के प्रमुख आयोजकों में मेहरू जाफर की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उस सम्मेलन को सफल बनाने में उनके योगदान को पत्रकारिता जगत आज भी याद करता है।
प्रेस क्लब और पत्रकार संगठनों ने जताया शोक
यू.पी. वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन के अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी और महामंत्री देवराज सिंह, आईएफडब्ल्यूजे के अध्यक्ष गोपाल मिश्र एवं मंत्री विश्वदेव राव, यू.पी. प्रेस क्लब के अध्यक्ष रवीन्द्र कुमार सिंह तथा यूनियन की लखनऊ इकाई के अध्यक्ष शिव शरण सिंह ने मेहरू जाफर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने इसे पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
लखनऊ की पहली महिला पत्रकारों में थीं शामिल
मेहरू जाफर को लखनऊ की पहली महिला पत्रकार होने का गौरव प्राप्त था। उन्होंने 1970 के दशक की शुरुआत में उस समय पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा, जब इस पेशे में महिलाओं की भागीदारी बेहद सीमित थी। उनके साथ सीमा मुस्तफा और ललिता सुब्राह्मण्यम ने भी पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी शुरुआत की थी। मेहरू जाफर का योगदान आने वाली पीढ़ियों की महिला पत्रकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत माना जाता है।
