तेहरान में धमाके, तेल अवीव में अलर्ट – Middle East फिर बारूद पर

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

मध्य पूर्व की राजनीति में ‘calm before the storm’ अक्सर सिर्फ मुहावरा नहीं होता वो एक चेतावनी होती है। ताज़ा घटनाक्रम में Israel ने Iran पर मिलिट्री ऑपरेशन शुरू करने की पुष्टि की है। इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने साफ किया कि यह “precautionary strike” है यानि एहतियातन हमला।

तेहरान और आसपास के इलाकों से धमाकों की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय मीडिया में लगातार ब्रेकिंग फ्लैश चल रहे हैं। माहौल ऐसा है मानो “diplomacy” ने बैकसीट ले ली हो और “deterrence” ने स्टीयरिंग संभाल ली हो।

इजरायल में Emergency Mode ON

हमले से पहले ही इजरायल सरकार ने अपने नागरिकों को मोबाइल अलर्ट भेज दिए। पूरे देश में इमरजेंसी लागू कर दी गई है। स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और दफ्तर बंद। Public gatherings पर रोक। Work From Home की सलाह।

सरकार का संदेश साफ है “Stay Alert, Stay Indoors.”

यह कदम बताता है कि ऑपरेशन सिर्फ सीमित कार्रवाई नहीं, बल्कि बड़े रणनीतिक संकेत भी दे रहा है। सवाल उठता है क्या यह सिर्फ चेतावनी है या लंबी लड़ाई का ट्रेलर?

“एहतियात” या Strategy?

“एहतियातन हमला” यह शब्द जितना कूटनीतिक लगता है, उतना ही विस्फोटक भी। क्योंकि एहतियात तब किया जाता है जब खतरा वास्तविक हो… या जब खतरे की आशंका को संदेश में बदलना हो।

Middle East की राजनीति में narrative भी हथियार होता है। एक देश कहता है—“self-defense”, दूसरा कहता है—“aggression”। और दुनिया? वो बैठकर एक्सपर्ट पैनल में बहस देखती है।

Global Impact: तेल, बाजार और तनाव

Middle East में किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। Oil prices, global markets, diplomatic alignments—सब पर ripple effect पड़ता है। अगर तनाव बढ़ता है तो यह संघर्ष regional से global headlines में बदल सकता है। फिलहाल दुनिया “wait and watch” मोड में है।

तेहरान में धमाकों की खबरें हैं, इजरायल में सायरन और शेल्टर की तैयारी। दोनों पक्ष अपने-अपने नैरेटिव के साथ खड़े हैं। लेकिन असली सवाल वही है क्या यह limited strike रहेगा या escalation की सीढ़ी चढ़ेगा?

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