ग्लासगो: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने इतिहास रचते हुए महिला 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इस उपलब्धि के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। फाइनल मुकाबले में उन्होंने कनाडा की हेडी काच को हराकर भारत के नाम यह ऐतिहासिक सफलता दर्ज कराई।
फाइनल तक शानदार प्रदर्शन, हर मुकाबले में दिखाया दम
अस्मिता डे ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को इप्पोन से हराया। इसके बाद सेमीफाइनल में स्कॉटलैंड की समर शॉ को युको (1-0) के अंतर से मात देकर फाइनल में जगह बनाई।
खिताबी मुकाबले में उनका सामना कनाडा की हेडी काच से हुआ। कांटे की टक्कर वाले इस मुकाबले का फैसला ‘गोल्डन स्कोर’ में हुआ, जहां अस्मिता ने जीत दर्ज कर भारत के लिए स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया।
त्रिपुरा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
अस्मिता डे त्रिपुरा के बेलोनिया शहर की रहने वाली हैं। जूडो में आने से पहले वह एथलेटिक्स में 800 मीटर दौड़ की खिलाड़ी थीं। जिला स्तरीय ट्रायल के दौरान उनकी रुचि जूडो की ओर बढ़ी और उन्होंने इसी खेल में अपना करियर बनाने का फैसला किया।
उन्होंने भोपाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के क्षेत्रीय केंद्र में कोच यशपाल सोलंकी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्तमान में वह सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के डेवलपमेंट ग्रुप का हिस्सा हैं।
जूडो में भारत का एक और पदक हुआ पक्का
अस्मिता डे की ऐतिहासिक जीत के साथ भारत के लिए जूडो में एक और पदक भी सुनिश्चित हो गया। पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। अब उनकी नजरें स्वर्ण पदक जीतने पर टिकी हैं।
पदक तालिका में भारत का दमदार प्रदर्शन
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है। भारत अब तक कुल 18 पदक जीत चुका है, जिनमें 4 स्वर्ण, 10 रजत और 4 कांस्य पदक शामिल हैं। इस प्रदर्शन के दम पर भारत पदक तालिका में नौवें स्थान पर पहुंच गया है। प्रतियोगिता के नौवें दिन भी भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद बनी हुई है।
