
अगर कल युद्ध हुआ और देश ने पुकारा— तो क्या आज का युवा Netflix, नौकरी, Insta और comfort zone छोड़कर वर्दी पहनने को तैयार है? Hello UP ने यही सवाल पूछा देश के 10 बड़े शहरों के युवाओं से—
गोरखपुर, रांची, हैदराबाद, लखनऊ, पटना, भोपाल, मुंबई, बहराइच, दिल्ली और गंगटोक।
नतीजा?
जवाबों में न जाति थी, न धर्म, न भाषा— सिर्फ एक कॉमन लाइन थी “देश बुलाएगा तो पीछे नहीं हटेंगे।”
ये सवाल पूछना हमने 24 दिसंबर से आरंभ किया था। आइये जानते हैं क्या है युवाओ के जवाब-
गोरखपुर (गौरव त्रिपाठी की रिपोर्ट)
- आदित्य मिश्रा – “देश ने बुलाया तो नौकरी नहीं, वर्दी चुनूंगा।”
- सबा खान – “डर लगेगा, लेकिन पीछे नहीं हटूंगी।”
- रवि निषाद – “सीमा पर जाना गर्व है, मजबूरी नहीं।”
- पूजा वर्मा – “देश सुरक्षित रहेगा तभी भविष्य सुरक्षित है।”
- अंकुर पांडे – “युद्ध हुआ तो सवाल नहीं, सीधा जवाब दूंगा।”
- फैसल अली – “वतन मजहब से बड़ा है।”
- नीरज यादव – “हम पैदा ही लड़ने को हुए हैं।”
- शिवानी सिंह – “महिलाएं पीछे नहीं, बराबर खड़ी होंगी।”
- मोहन पासवान – “देश मां है, रक्षा धर्म।”
- आकांक्षा तिवारी – “यूनिफॉर्म पहनना सौभाग्य होगा।”
रांची ( मंजेश कुमार की रिपोर्ट)
- अंकित उरांव – “जंगल ने सिखाया है, देश बचाना आता है।”
- सोनाली तिर्की – “Women warriors कोई नई बात नहीं।”
- इरफान अंसारी – “तिरंगा सबका है।”
- रोहित महतो – “गोली से नहीं, इरादे से जीतते हैं।”
- पूजा कच्छप – “देश बुलाए तो घर रुकावट नहीं।”
- संदीप गुप्ता – “सीमा पर जाना सम्मान है।”
- आशा मिंज – “डर से बड़ी जिम्मेदारी है।”
- नदीम खान – “वतन के लिए सब जायज है।”
- विकास सिंह – “देश पहले, बाकी बाद में।”
- रिया टोप्पो – “मैं तैयार हूं, पूरी तरह।”
हैदराबाद (संजीव पॉल की रिपोर्ट)
- शेख फरहान – “Coding छोड़कर country choose करूंगा।”
- अनुष्का रेड्डी – “Gender नहीं, guts मायने रखता है।”
- साई किरण – “Army को दिमाग भी चाहिए।”
- आयशा बेगम – “डर को घर छोड़ दूंगी।”
- राहुल वर्मा – “देश के लिए कोई excuse नहीं।”
- मो. शफीक – “सीमा पर खड़ा होना इबादत है।”
- नव्या चेट्टी – “Comfort से ऊपर country।”
- अरविंद नायक – “Ready on day one।”
- पूजा शर्मा – “Uniform में बराबरी है।”
- इमरान सिद्दीकी – “भारत मेरी पहचान है।”
लखनऊ (साक्षी दुबे की रिपोर्ट)
- आर्यन अवस्थी – “कुर्सी नहीं, country चाहिए।”
- नूर फातिमा – “देश है तो हम हैं।”
- अभिषेक सिंह – “सैनिक बनना स्टेटस है।”
- शाहिद अली – “वतन से समझौता नहीं।”
- रश्मि श्रीवास्तव – “डर को पीछे छोड़ दूंगी।”
- मोहित गुप्ता – “सीमा पर जाना गर्व है।”
- फरहा खान – “देश की रक्षा सबका फर्ज।”
- सौरभ शुक्ला – “जब बुलावा आएगा, जाऊंगा।”
- पायल मिश्रा – “महिलाएं भी मोर्चे पर होंगी।”
- आदिल रज़ा – “भारत पहले, बाकी सब बाद में।”
पटना (आलोक कुमार की रिपोर्ट)
- रोहित पासवान – “वोट ही नहीं, खून भी देंगे।”
- सना परवीन – “देश के लिए मरना इज्जत है।”
- मनीष यादव – “डर सबको लगता है, भागते नहीं।”
- पूजा कुमारी – “सीमा पर खड़ी दिखूंगी।”
- इरशाद आलम – “वतन मेरी शान है।”
- रवि शर्मा – “युद्ध हुआ तो सवाल नहीं।”
- नेहा सिंह – “Duty is duty.”
- अमन गुप्ता – “देश बचा तो सब बचेगा।”
- नाजिया खातून – “तिरंगा सबका है।”
- चंदन कुमार – “तैयारी अभी से है।”
भोपाल (ठाकुर सतेन्द्र सिंह की रिपोर्ट)
- आदिल खान – “Uniform मजहब नहीं पूछती।”
- प्रीति चौहान – “War responsibility है।”
- राहुल सोलंकी – “Nation calls, I answer।”
- इमरान कुरैशी – “देश के लिए सब कुर्बान।”
- साक्षी जैन – “महिलाएं पीछे नहीं।”
- नितिन पटेल – “सीमा पर जाना सम्मान।”
- शबाना सिद्दीकी – “वतन से बढ़कर कुछ नहीं।”
- विक्रम ठाकुर – “Ready anytime।”
- अंजलि वर्मा – “Duty first।”
- फराज अली – “भारत मेरी पहचान।”
मुंबई (भोजराज की रिपोर्ट)
- करण शेट्टी – “Comfort छोड़ सकते हैं, देश नहीं।”
- आयशा सिद्दीकी – “Patriotism reel नहीं, real है।”
- प्रणव देशमुख – “Border पहले, Bollywood बाद में।”
- सलीम खान – “वतन सबसे ऊपर।”
- रिया पाटिल – “Uniform equals respect।”
- आदित्य कुलकर्णी – “Ready for service।”
- नेहा लोखंडे – “देश बुलाए तो घर नहीं रोकेगा।”
- इमरान शेख – “India first always।”
- सागर चव्हाण – “सीमा मेरी मंजिल।”
- पूजा मेहता – “Proud to serve.”
बहराइच (अजमल शाह की रिपोर्ट)
- फैसल अली – “देश ने सब दिया।”
- पूजा वर्मा – “Fear temporary है।”
- अजय मौर्य – “अगर हम नहीं तो कौन?”
- साजिद खान – “वतन के लिए सब।”
- नीलम गुप्ता – “देश सुरक्षित तो भविष्य सुरक्षित।”
- रामकेवल पासवान – “सेवा मेरा धर्म।”
- शबनम बानो – “सीमा पर जाने से नहीं डरूंगी।”
- विकास सिंह – “Nation first।”
- अर्जुन यादव – “तैयार हूं।”
- रुखसार खातून – “भारत मेरी शान।”
दिल्ली (शकील अहमद की रिपोर्ट)
- नवीन मल्होत्रा – “AC छोड़कर AK उठाऊंगा।”
- इकरा खान – “Patriotism कोई hashtag नहीं।”
- हर्षित त्यागी – “Debate नहीं, duty।”
- सोनू गुर्जर – “देश पहले।”
- निधि सक्सेना – “Ready anytime।”
- अमन अरोड़ा – “Nation above all।”
- शाजिया रहमान – “वर्दी गर्व है।”
- रवि चौहान – “सीमा पर जाना सम्मान।”
- पूजा रावत – “महिलाएं भी मोर्चे पर।”
- दानिश अंसारी – “भारत मेरी पहचान।”
गंगटोक (ली चैंग की रिपोर्ट)
- तेनजिंग भूटिया – “Border हमारा घर है।”
- प्रिया लेपचा – “Women warriors are ready।”
- आशुतोष शर्मा – “Mountains make soldiers।”
- पासांग तमांग – “देश पहले।”
- सोनम शेरपा – “सीमा मेरी जिम्मेदारी।”
- राहुल लिम्बू – “Ready to serve।”
- नूरजहां खातून – “वतन से बड़ा कुछ नहीं।”
- विक्रम राई – “Duty is honour।”
- पूजा प्रधान – “Proud Indian।”
- इमरान अली – “India above all।”
देश ने बुलाया, युवा तैयार हैं!
गोरखपुर से गंगटोक तक, 100 युवा – लड़के और लड़कियाँ, अलग-अलग नाम, अलग-अलग समुदाय, अलग-अलग शहर – पर जो जवाब आया, वह एक ही था: “देश ने कहा तो हम सीमा पर खड़े होंगे, चाहे चुनौती कितनी भी बड़ी क्यों न हो।”
यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारत का युवा सिर्फ hashtags और likes में नहीं, बल्कि असली देशभक्ति और जिम्मेदारी में भी आगे है।
नाम और शहर अलग हो सकते हैं, पर तिरंगा और देशभक्ति सभी में एक समान। देश ने बुलाया, और युवा कह रहे हैं – हम तैयार हैं!
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