नई दिल्ली: ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले को लेकर सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस फैसले को वापस लेने या इसमें दोबारा बदलाव करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था पूरे UPI सिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत और लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है।
₹2000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर लागू होगा MDR
सरकार के फैसले के तहत ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया जाएगा। इस फैसले को लेकर व्यापारियों और दुकानदारों की ओर से विरोध की बात सामने आई है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक सरकार इस नीति पर पुनर्विचार नहीं कर रही है। सरकार का तर्क है कि नए MDR ढांचे से UPI व्यवस्था के लिए स्थायी राजस्व मॉडल तैयार करने में मदद मिलेगी।
जीरो MDR व्यवस्था पर संसदीय समिति ने जताई थी चिंता
वित्त संबंधी संसद की स्थायी समिति की 32वीं रिपोर्ट में जीरो MDR व्यवस्था को लेकर चिंता जताई गई थी। समिति के अनुसार इस व्यवस्था को जारी रखने के लिए सरकार को हर साल करीब ₹2,000 करोड़ की बजटीय सहायता देनी पड़ रही थी।
समिति ने UPI के लिए ऐसे राजस्व मॉडल की जरूरत बताई थी, जिससे डिजिटल भुगतान व्यवस्था लंबे समय तक सरकारी सहायता पर निर्भर न रहे।
ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा MDR चार्ज
सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR का बोझ सीधे UPI का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। यह शुल्क मर्चेंट यानी दुकानदारों और कारोबारियों से संबंधित होगा।
पर्सन-टू-पर्सन यानी P2P ट्रांसफर और ₹2,000 तक के छोटे मर्चेंट UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। आम UPI यूजर्स के लिए भी किसी मासिक लेनदेन सीमा या कोटे की बात नहीं कही गई है।
डिजिटल पेमेंट के विस्तार पर खर्च होगा शुल्क
सरकार के मुताबिक MDR से मिलने वाली राशि का एक बड़ा हिस्सा डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल पेमेंट की पहुंच बढ़ाने के साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना भी शामिल है।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य UPI के मौजूदा ढांचे को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आगे विस्तार देना है।
विपक्ष के आरोपों पर सरकार ने दिया जवाब
नए MDR ढांचे को लेकर विपक्ष की ओर से सरकार पर बाहरी दबाव में फैसला लेने के आरोप भी लगाए गए हैं। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह फैसला UPI इकोसिस्टम की वित्तीय मजबूती और दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
