फसल नुकसान पर डीएम का बड़ा निर्देश, ग्रोवर के जरिए होगा सत्यापन, बीमा कंपनियों को भी दिए सख्त आदेश

झांसी ( देवेश प्रताप सिंह राठौर) : अतिवृष्टि से फसलों को हुए नुकसान और किसानों की समस्याओं को लेकर आयोजित किसान दिवस में जिलाधिकारी गौरांग राठी ने विकास भवन सभागार से कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने जनपद में फसल क्षति के सर्वे की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को ग्रोवर के माध्यम से फसल क्षति का सत्यापन कराने के निर्देश दिए। साथ ही किसानों से खेतों में आग नहीं लगाने की अपील की।

किसानों की शिकायतों का तत्काल निस्तारण करने के निर्देश

जिलाधिकारी ने कहा कि अतिवृष्टि को देखते हुए सभी अधिकारी किसानों की शिकायतों और समस्याओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुनें और उनका तत्काल समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि किसान दिवस शासन की प्राथमिकता वाला कार्यक्रम है, इसलिए इसकी गंभीरता बनाए रखना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने किसानों से खेती से जुड़ी अधिक से अधिक समस्याएं रखने की अपील की, ताकि उनका समयबद्ध समाधान किया जा सके।

अधिकारियों की अनुपस्थिति पर होगी कार्रवाई

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसान दिवस में प्राप्त सभी शिकायतों और समस्याओं का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी किसान बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देने, खेती को लाभकारी बनाने, उत्पादन बढ़ाने और उपज का बेहतर मूल्य दिलाने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

बीमा कंपनी को न्याय पंचायत स्तर पर कैंप लगाने का आदेश

किसान दिवस के दौरान किसानों ने मूंगफली और उड़द की फसल में हुए नुकसान के साथ फसल बीमा से जुड़ी शिकायतें उठाईं। इस पर जिलाधिकारी ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को निर्देश दिए कि न्याय पंचायत स्तर पर जल्द से जल्द शिविर आयोजित कर बीमित किसानों को बीमा पॉलिसी से जुड़ी सभी जानकारियां उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि निर्धारित अंश के अनुसार ही फसल बीमा प्रीमियम काटा जाए, ताकि फसल क्षति होने पर किसानों को क्लेम प्राप्त करने में कोई परेशानी न हो। किसानों से उन्होंने बीमा क्लेम की जानकारी कृषि विभाग को भी उपलब्ध कराने की अपील की, जिससे जरूरत पड़ने पर समीक्षा की जा सके।

पराली नहीं जलाने के लिए किसानों को किया जागरूक

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक किया। उन्होंने महिला किसानों सहित सभी कृषकों से अपील की कि खेतों में आग लगाने या कृषि अवशेष जलाने से बचें। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप किसानों को निःशुल्क वेस्ट डी-कंपोजर कैप्सूल उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनका उपयोग कर पराली को खाद में बदला जा सकता है और फसल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

पराली जलाने से पर्यावरण और खेती दोनों को नुकसान

जिलाधिकारी ने विशेष रूप से विकास खंड मोट, बड़ागांव और चिरगांव के किसानों को जागरूक करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेतों में आग लगाने से वातावरण प्रदूषित होता है, खेतों के मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी के पोषक तत्वों को भी नुकसान पहुंचता है, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

पराली जलाने पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान

जिलाधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अभिकरण के आदेशों के अनुसार फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध है। पर्यावरण विभाग के निर्देशानुसार दो एकड़ से कम क्षेत्र में पराली जलाने पर 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ तक 5000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में 15000 रुपये तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि जनपद में पराली जलाने की घटना मिलने पर संबंधित व्यक्ति से राष्ट्रीय हरित अभिकरण अधिनियम की धारा 24 के तहत क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी तथा धारा 26 के तहत दोबारा उल्लंघन करने पर कारावास और अर्थदंड की कार्रवाई भी की जा सकती है।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी भी रहे मौजूद

किसान दिवस के अवसर पर आयोजित बैठक में मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड ने भी किसानों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ प्रतिभाग किया।

 

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