नई दिल्ली: पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी नेटवर्क को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की पहली अनुसूची में आतंकी संगठन के तौर पर नामित किए जाने के बाद भारतीय जांच एजेंसियों के लिए इस नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई का कानूनी दायरा बढ़ गया है। राज्यों की आतंकवाद निरोधक इकाइयां भी अब नेटवर्क से जुड़े मामलों में संगठन के संबंध, वित्तीय मदद, भर्ती, हथियारों और डिजिटल गतिविधियों की अलग-अलग स्तर पर जांच कर सकती हैं।
यूएपीए की पहली अनुसूची में नामित हुआ नेटवर्क
गृह मंत्रालय की ओर से शहजाद भट्टी नेटवर्क को यूएपीए की पहली अनुसूची में आतंकी संगठन के तौर पर नामित किया गया है। इसके बाद नेटवर्क के खिलाफ जांच और कार्रवाई के लिए एजेंसियों को पहले की तुलना में मजबूत कानूनी आधार मिला है।
नेटवर्क से जुड़ाव भी जांच के दायरे में
अब जांच एजेंसियां किसी व्यक्ति की भूमिका को केवल किसी एक आपराधिक घटना तक सीमित करके नहीं देखेंगी। यह भी जांच का हिस्सा हो सकता है कि संबंधित व्यक्ति का संगठन से क्या संबंध है, वह इसकी गतिविधियों के लिए धन जुटा रहा था या नहीं, किसी की भर्ती में शामिल था या नेटवर्क को चलाने में मदद कर रहा था या नहीं।
भर्ती और मदद करने वालों पर भी कार्रवाई
यूएपीए के तहत प्रतिबंधित संगठन से जुड़ना, उसके लिए लोगों की भर्ती करना या उसकी गतिविधियों में मदद करना अपराध के दायरे में आ सकता है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां आरोपी की संगठन से संबद्धता और उसकी भूमिका से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल कर सकती हैं।
जमानत के प्रावधान सामान्य कानून से ज्यादा सख्त
यूएपीए के मामलों में जमानत के प्रावधान सामान्य आपराधिक कानून की तुलना में अधिक सख्त हैं। जांच के दौरान यदि हथियार, विस्फोटक या अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आते हैं तो मामले की कानूनी स्थिति और गंभीर हो सकती है। कुछ परिस्थितियों में कानून के तहत अदालत के स्तर पर अभियोजन के पक्ष में कानूनी अनुमान भी लागू हो सकता है।
जांच के लिए मिल सकता है अतिरिक्त समय
यूएपीए के तहत जांच एजेंसियों को सामान्य मामलों की तुलना में अधिक समय मिल सकता है। पुलिस कस्टडी की अवधि 15 दिन से बढ़कर 30 दिन तक हो सकती है। इसके अलावा जांच एजेंसियों को चार्जशीट दाखिल करने के लिए 180 दिन तक का समय मिल सकता है।
आईएसआई पर भी लगाए गए गंभीर आरोप
जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई पर शहजाद भट्टी को माध्यम बनाकर भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में नेटवर्क को आतंकी संगठन घोषित किए जाने को जांच एजेंसियों की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण कानूनी कदम माना जा रहा है।
