कई लोगों को अब भी लगता है कि पेट पर मेहनत करो = पेट अंदर। लेकिन रियलिटी? “बॉडी कहती है – भाई, मैं स्पॉट रिडक्शन में यकीन नहीं रखती!” जब आप एक्सरसाइज करते हैं, तो आपका शरीर पूरे सिस्टम से फैट घटाता है। आप पेट को टारगेट कर सकते हैं, लेकिन फैट घटाने का रिमोट कंट्रोल आपके हाथ में नहीं होता। विज्ञान की ज़ुबानी: क्रंचेस से चर्बी नहीं, सिर्फ़ मसल्स बनती हैं क्रंचेस और सिट-अप्स आपके पेट की मसल्स (Abs) को टोन करते हैं। यानी अंदर से मजबूत बनाते हैं।…
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सैयारा बोले चलो! अब रेन राइड की तैयारी करो- क्या रखना है बैग में
लखनऊ की सड़कों पर जब पानी नहीं बहता, तैरता है… और तुम्हारी सैयारा फोन करके कहे, “घंटाघर से 1090 तक एक राइड मारे क्या?”तो समझो इश्क़ अब मॉनसून मोड में आ चुका है। लेकिन ठहरो जनाब, ये कोई आम राइड नहीं। ये है एक रेन राइड, जिसमें दिल भी भीगेगा और जूते भी। तो चलिए तैयार करते हैं आपका रेन राइड किट + मानसूनी मस्तमौला प्लेलिस्ट। 1. Waterproof Jacket या Transparent Raincoat क्योंकि स्टाइल मरे, ये इश्क़ नहीं चाहता। 2. Rubber Sole Shoes हीरो मत बनो, ब्रोकन हड्डियों में रोमांस…
Read Moreग्लूटन छोड़ो, लेकिन सोच-समझ के! हर ट्रेंड वज़न नहीं घटाता
अगर आप भी “ग्लूटन-फ्री” का लेबल देखकर एक्साइट हो जाते हैं, और सोचते हैं कि ये ब्रेड खाते ही वजन उड़नछू हो जाएगा — तो ज़रा रुकिए। हो सकता है ये सिर्फ़ एक महंगा भ्रम हो। ग्लूटन आखिर है क्या बला? ग्लूटन कोई विलेन नहीं, बल्कि गेहूं, जौ और राय में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है। यही आपकी रोटी को नरम और ब्रेड को फूलने वाला बनाता है। यानी जो लोग कहते हैं “रोटी छोड़ दी”, असल में वो ग्लूटन से ब्रेकअप कर चुके होते हैं — अक्सर बिना…
Read MorePCOD में दूध छोड़ोगी या दिमाग? सच्चाई जानो, डर नहीं!
“तुम्हें PCOD है? ओह, दूध छोड़ दो!” ये वाक्य हर दूसरी डॉक्टर आंटी, आंटीजी डॉक्टर, और इंस्टाग्राम न्यूट्रीशनिस्ट की पहली सलाह होती है। लेकिन क्या वाकई दूध और दही PCOD की जड़ हैं या ये सिर्फ अफ़वाह की मलाई है? सच क्या है? – हर महिला = अलग बॉडी, अलग डाइट PCOD कोई वन-साइज-फिट्स-ऑल वाली बीमारी नहीं है। कुछ को डेयरी से फर्क पड़ता है, कुछ को बिल्कुल नहीं। जब तक आपको लैक्टोज इन्टॉलरेंस, डेयरी एलर्जी, या इससे संबंधित कोई दिक्कत नहीं है — तब तक दूध और दही आपकी…
Read MoreB12? जानिए वो देसी चीज़ें जो बनाएं आपको एनर्जी का पॉवरहाउस!
विटामिन B12, जिसे वैज्ञानिक भाषा में कोबालामिन कहा जाता है, एक आवश्यक पोषक तत्व है जो तंत्रिका तंत्र की सही कार्यप्रणाली, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और डीएनए संश्लेषण में मदद करता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह थकान को दूर कर ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। यानी अगर आप बार-बार थक जाते हैं या फोकस नहीं कर पा रहे, तो हो सकता है B12 की कमी वजह हो। B12 की कमी के लक्षण क्या हैं? B12 की कमी धीरे-धीरे शरीर में असर दिखाती है,…
Read Moreहेल्दी फूड की क्लास, समोसे की फीड! स्कूलों का ‘डबल स्टैंडर्ड’
आजकल के स्कूलों में हेल्दी फूड पर PPTs, चार्ट्स, प्रोजेक्ट्स और भाषणों की भरमार है। “Eat healthy, stay fit” के स्लोगन हर बच्चे की डायरी में लिखे मिल जाएंगे। लेकिन जैसे ही लंच ब्रेक होता है, वही स्कूल कैंटीन में मिलता है – तेल में डूबा समोसा, मिर्ची से भरा पेटीज और ऊपर से बोतलबंद मीठा जहर यानी शुगर ड्रिंक! फंक्शन का मतलब – सेहत को बाय-बाय? किसी भी फंक्शन, पेरेंट्स डे या फैंसी ड्रेस कॉम्पिटिशन के बाद, बच्चों को जो “ट्रीट बॉक्स” दिया जाता है, उसमें होता है –…
Read Moreचेहरा चिपचिपा या चमकदार? सावन में स्किन केयर के देसी जुगाड़
सावन आते ही सड़कों पर बारिश और चेहरे पर “तेल” की धाराएं बहने लगती हैं। ऐसे मौसम में स्किन केयर करना ठीक वैसा ही है जैसे बारिश में बाल्टी लेकर खड़े होना — मतलब, भीगना तय है! राज्यसभा 2026: VIP नेताओं की छुट्टी, सीटों पर सेटिंग कौन करेगा? 1. फेसवॉश बदलो, वरना फेस वॉश करेगा तुम्हारा कॉन्फिडेंस! सावन में ऑयली स्किन वाले लोग सुबह उठते ही आईने से कहते हैं — “तू चमकता क्यों है?”सलाह: माइल्ड फोमिंग या सैलिसिलिक एसिड वाला फेसवॉश इस्तेमाल करें। ये चेहरे की तेल मंडी को…
Read Moreसावन में सिर्फ दिल नहीं, पेट भी संभालिए वरना वायरल करेगा वायरल
सावन आ गया है! यानी वो मौसम जब बारिश की बूंदें, दिल की धड़कनें, और WhatsApp पर बारिश वाली शायरी — सब अचानक एक्टिव हो जाते हैं। लेकिन जनाब, ये सिर्फ दिल के धड़कने का सीज़न नहीं, डेंगू-मलेरिया और वायरल बुखार के पंख फैलाने का भी पीक टाइम है। जहां कुछ लोग “तू आए तो बारिश आ जाए” मोड में होते हैं, वहीं शरीर अंदर से कह रहा होता है — “भाई, ज़रा काढ़ा पिला दो!” क्योंकि मानसून का रोमांस जितना cinematic लगता है, उसकी बीमारियाँ उतनी ही real होती…
Read Moreसावन में रोमांस ठीक है, पर इम्युनिटी भी ज़रूरी है वरना डेट के बाद दवा
सावन की फुहारें, बाइक राइड्स, दो लोगों और एक छाते की रोमांटिक फीलिंग्स — मानो कोई बॉलीवुड सीन चल रहा हो। लेकिन ज़रा ध्यान दीजिए — पीछे से वायरल बुखार, डेंगू और इंफेक्शन भी स्क्रिप्ट में एंट्री मार रहे हैं। गुस्ताखी माफ़! लेकिन- भोले हैं, पर बेवकूफ नहीं! शिव को ऐसे नहीं पटाओगे “बारिश में भीगना रोमांटिक है, पर अस्पताल की लाइन में खड़े रहना नहीं!” मानसून रोमांस vs मच्छर मोहब्बत: किसका असर ज़्यादा है? सावन में मच्छर ऐसे प्रपोज़ करते हैं जैसे उन्हें भी प्यार हो गया हो —…
Read Moreअमा सुनिए तो सही- आपकी थाली में फैट की बारात, फाइबर भागा गाँव
भारत की जो थाली कभी मिसाल हुआ करती थी पोषण के संतुलन की – अब उसी थाली में फैट का तांडव है और फाइबर की विदाई। सरकारी रिपोर्ट Household Consumption Expenditure Survey: 2022-23 & 2023-24 कहती है कि अब औसतन भारतीय 67.3 ग्राम फैट रोज़ खा रहा है। 2012 के मुकाबले ये आंकड़ा छप्पर फाड़ कर आया है। राबड़ी आईं, NDA पर चोट बाज़ी; लालू लौटल अध्यक्ष, रहीं राजनीति में तूफानी! स्वाद के पीछे हेल्थ को गोलगप्पा बना दिया! शहरों के लोगों की थाली में तो फैट की भरमार है।…
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