मिडिल ईस्ट में मिसाइलें बरस रहीं… और पाकिस्तान ने चाल चल दी!

अजमल शाह
अजमल शाह

मिडिल ईस्ट में मिसाइलों की आवाज़ अभी थमी भी नहीं है कि कूटनीति की एक नई चाल ने सबका ध्यान खींच लिया है। जंग के आठवें दिन अचानक पाकिस्तान के आर्मी चीफ की सऊदी अरब में एंट्री ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह सिर्फ एक मुलाकात है… या फिर पर्दे के पीछे कोई बड़ा रणनीतिक खेल चल रहा है?

मिडिल ईस्ट की जंग: आठवें दिन भी हालात गर्म

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच मिसाइलों और एयरस्ट्राइक की खबरें लगातार आ रही हैं। हजारों बम और रॉकेट दागे जा चुके हैं, और इसका असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है पूरी दुनिया की राजनीति और सुरक्षा समीकरण हिल चुके हैं।

कई देश इस जंग से दूरी बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन कूटनीतिक गतिविधियां अचानक तेज हो गई हैं। ऐसे माहौल में पाकिस्तान की एक चाल ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल बढ़ा दी है।

अचानक सऊदी अरब पहुंचे आसिम मुनीर

जंग के बीच पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर का अचानक सऊदी अरब पहुंचना कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।रियाद में उनकी मुलाकात सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान से हुई। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पूरे क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है और हर देश अपने सुरक्षा समीकरण मजबूत करने में लगा है।

दिलचस्प बात यह रही कि इस मुलाकात की जानकारी खुद सऊदी रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर दी।

रियाद बैठक में क्या हुई चर्चा

खालिद बिन सलमान ने एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए बताया कि उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख और रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की।

उनके अनुसार बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक रक्षा सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ ही ईरान द्वारा पाकिस्तान पर किए जा रहे हमलों और उन्हें रोकने के उपायों पर भी विचार किया गया।

उन्होंने कहा कि ऐसे कदम क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करते हैं और उम्मीद जताई कि ईरान भविष्य में किसी भी तरह की गलत रणनीतिक गणना से बचेगा।

क्या पाकिस्तान कोई नया खेल खेल रहा है?

हमारे एडिटोरियल एडवाइजर अजीत उजैनकर के अनुसार यह सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं हो सकती। मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच पाकिस्तान और सऊदी अरब की रणनीतिक बातचीत कई संकेत देती है।

सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान खुद को इस संकट में एक अहम खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना चाहता है। या फिर यह मुलाकात सिर्फ सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता तक सीमित है।

लेकिन इतना तय है कि जिस समय मिसाइलें चल रही हों, उस वक्त होने वाली हर कूटनीतिक बैठक के मायने कई गुना बढ़ जाते हैं।

क्षेत्रीय राजनीति में नया समीकरण?

मिडिल ईस्ट की राजनीति पहले ही बेहद जटिल रही है। अब अगर पाकिस्तान, सऊदी अरब और अन्य क्षेत्रीय शक्तियां नए सुरक्षा समीकरण बनाती हैं तो इसका असर सिर्फ इस युद्ध तक सीमित नहीं रहेगा।

कूटनीति की दुनिया में कई बार बंद कमरों में हुई एक बैठक भी आने वाले महीनों की राजनीति तय कर देती है। और फिलहाल रियाद में हुई यह मुलाकात उसी तरह की एक चाल लग रही है।

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