वॉशिंगटन: अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। यह सैन्य कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के कुछ ही घंटों बाद की गई। अमेरिका और ईरान के बीच जंग रोकने के लिए हुए अंतरिम समझौते के बाद यह ताजा सैन्य अभियान मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ाने वाली बड़ी घटना माना जा रहा है।
शांति वार्ता पर फिर मंडराया संकट
बताया जा रहा है कि ईरान की ओर से जहाजों पर हमला उस समय किया गया, जब देश के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के अंतिम विदाई कार्यक्रम का सिलसिला जारी था। युद्ध की शुरुआत में ही खामेनेई की मौत हो गई थी। इस घटनाक्रम के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने, ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और 28 फरवरी से जारी संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने के प्रयासों पर भी संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।
व्यापारिक जहाजों पर हमले के जवाब में हुई एयरस्ट्राइक
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में निर्दोष नागरिकों के चालक दल वाले व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के जवाब में की गई है। बयान में कहा गया कि ऐसे हमलों की भारी कीमत चुकानी होगी।
ईरान के सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, एंटी-शिप क्रूज मिसाइल ठिकानों, ड्रोन लॉन्च साइट्स, तटीय निगरानी प्रणालियों, जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और बंदरगाहों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया है। अधिकारी ने बताया कि यह सैन्य अभियान कई घंटों तक जारी रह सकता है।
इस बार पहले से कई गुना बड़ा अभियान
एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि जून के आखिर में किए गए जवाबी हमलों की तुलना में इस बार करीब आठ गुना अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक, अमेरिका की चेतावनियों के बावजूद ईरान की ओर से कोई नरमी नहीं दिखाई गई, जिसके चलते सैन्य दबाव और बढ़ाया गया है। दोनों अधिकारियों ने अभियान की संवेदनशीलता को देखते हुए अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं की।
कई इलाकों में धमाकों की आवाजें
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, क़ेश्म, बंदर अब्बास और सीरिक में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। वहीं, ईरान के उपविदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका की यह सैन्य कार्रवाई दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते का उल्लंघन है।
