जल्दी वजन घटाने के चक्कर में न करें ये गलती, कम कैलोरी डाइट शुरू करने से पहले जान लें फायदे और नुकसान

सिडनी: वजन कम करने के लिए कैलोरी घटाने वाली डाइट काफी लोकप्रिय है। इससे शुरुआत में वजन और कमर का घेरा कम हो सकता है, लेकिन वजन घटाने के बाद उसे लंबे समय तक बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। शोध के अनुसार, वजन कम होने के बाद शरीर में भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन और ऊर्जा खर्च से जुड़े बदलाव हो सकते हैं, जिसकी वजह से कुछ लोगों का घटा हुआ वजन दोबारा बढ़ सकता है।

कैसे काम करती है कम कैलोरी डाइट

कम कैलोरी डाइट में व्यक्ति अपने भोजन से मिलने वाली ऊर्जा की मात्रा कम करता है। जब शरीर को जरूरत के मुकाबले कम ऊर्जा मिलती है, तो वह जमा वसा का इस्तेमाल करना शुरू कर सकता है। इससे समय के साथ वजन कम होने लगता है।

इस तरह की डाइट में इंटरमिटेंट फास्टिंग, अल्टरनेट डे फास्टिंग और फास्ट 800 जैसी पद्धतियां शामिल हैं। कुछ डाइट योजनाओं में रोजाना करीब 500 से 600 कैलोरी कम लेने की सलाह दी जाती है, जबकि बहुत कम कैलोरी वाली डाइट में पूरे दिन 800 से कम कैलोरी लेने को कहा जाता है।

वजन घटाने के साथ मिल सकते हैं ये फायदे

अलग-अलग शोधों में पाया गया है कि कैलोरी कम करने वाली डाइट से वजन और कमर का घेरा घट सकता है। अधिक वजन, मोटापे या टाइप-2 मधुमेह से जूझ रहे कुछ लोगों में वजन कम होने से रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण में सुधार भी देखा गया है। इससे हृदय रोग से जुड़े कुछ जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, उपलब्ध कई अध्ययनों की अवधि कुछ सप्ताह से लेकर करीब 12 सप्ताह तक रही है। इसलिए लंबे समय तक वजन को बनाए रखने के प्रभाव को लेकर तस्वीर अलग हो सकती है।

डॉक्टर की निगरानी के बिना न अपनाएं बहुत कम कैलोरी वाली डाइट

बहुत कम कैलोरी वाली डाइट हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होती। कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे किसी सर्जरी से पहले तेजी से वजन कम करने के लिए, डॉक्टर ऐसी डाइट की सलाह दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय निगरानी जरूरी होती है, ताकि शरीर को पर्याप्त विटामिन, खनिज और दूसरे जरूरी पोषक तत्व मिलते रहें।

वजन घटने के बाद क्यों बढ़ सकती है भूख

वजन कम होने के साथ शरीर में कई बदलाव हो सकते हैं। भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन में बदलाव होने से व्यक्ति को पहले की तुलना में ज्यादा भूख महसूस हो सकती है। वहीं, वजन कम होने के बाद शरीर ऊर्जा भी कम खर्च कर सकता है।

इस वजह से वजन घटने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है या कुछ समय के लिए वजन एक स्तर पर रुक सकता है। इसे सोशल मीडिया पर प्रचलित ‘स्टारवेशन मोड’ कहकर समझना सही नहीं है। वजन घटने के बाद ऊर्जा खर्च और भूख से जुड़े बदलाव शरीर की अलग प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

लगातार भूख लगना कैलोरी सीमित करने वाली डाइट का पालन करने में बड़ी चुनौती बन सकता है। इसके अलावा मूड, नींद और भोजन के साथ व्यक्ति के संबंध पर भी असर पड़ सकता है। अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के भूख में अचानक बदलाव आए और इसके साथ चक्कर, अत्यधिक थकान या ध्यान लगाने में परेशानी हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

किन लोगों को बरतनी चाहिए ज्यादा सावधानी

कैलोरी कम करने वाली डाइट कुछ अधिक वजन या मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है। टाइप-2 मधुमेह या गठिया जैसी कुछ स्थितियों में भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार वजन कम करना लाभकारी हो सकता है।

हालांकि, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं, बच्चों और किशोरों को बिना विशेषज्ञ निगरानी ऐसी डाइट नहीं अपनानी चाहिए। खाने से जुड़े विकारों से जूझ रहे लोगों को भी कैलोरी कम करने वाली डाइट शुरू करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

तेजी से कैलोरी घटाने के बजाय टिकाऊ बदलाव जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादातर लोगों के लिए केवल तेजी से कैलोरी कम करने के बजाय पूरे आहार और जीवनशैली में लंबे समय तक टिकने वाले बदलाव ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। नमक, अतिरिक्त चीनी और अधिक वसा वाले भोजन को सीमित करना, शराब का सेवन कम करना, भोजन की मात्रा पर नियंत्रण रखना और नियमित शारीरिक गतिविधि वजन प्रबंधन में मदद कर सकती है।

इसके साथ पहले से भोजन की योजना बनाना और भूख तथा पेट भरने के संकेतों पर ध्यान देना भी उपयोगी हो सकता है।

प्रोटीन और फाइबर वाले भोजन को दें प्राथमिकता

आहार विशेषज्ञ पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर वाले भोजन को आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं। सब्जियां, दालें और साबुत अनाज इसके अच्छे स्रोत हो सकते हैं।

कैलोरी सीमित करने वाली कोई भी डाइट शुरू करने से पहले मान्यता प्राप्त आहार विशेषज्ञ या चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है। उम्र, स्वास्थ्य, शारीरिक गतिविधि और पोषण संबंधी जरूरतों के आधार पर बनाई गई डाइट योजना वजन कम करने के साथ उसे लंबे समय तक बनाए रखने में मदद कर सकती है।

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