नई दिल्ली: संसद के मौजूदा सत्र में लगातार जारी विपक्ष के विरोध और राजनीतिक तनातनी के बीच केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक 31 जुलाई को दोपहर 1 बजे संसद में बुलाई गई है। इससे पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय में केंद्रीय मंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें सरकार की शीर्ष नेतृत्व टीम ने हिस्सा लिया।
इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मौजूद रहे। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी शामिल हुए। इसके अलावा जेपी नड्डा, पीयूष गोयल, हरदीप सिंह पुरी और सर्बानंद सोनोवाल भी बैठक का हिस्सा रहे। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा भी बैठक में उपस्थित थे। संसद में जारी विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के बीच इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विपक्ष के विरोध के बीच बुलाई गई मंत्रिमंडल की बैठक
संसद में विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रही है। विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह से बयान की मांग पर अड़ा हुआ है। इसी बीच 31 जुलाई को होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
राज्यसभा में खरगे ने परीक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि केवल कड़े कानूनी प्रावधानों से प्रश्न पत्र लीक की घटनाएं नहीं रुकेंगी। उन्होंने सरकार से समयबद्ध वार्षिक परीक्षा कैलेंडर तैयार करने की मांग की और कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार किए बिना ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक नहीं लगाई जा सकती।
खरगे ने कहा कि सरकार को यह कदम पहले ही उठाना चाहिए था और उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक अभी भी अधूरा है। उनके अनुसार, छात्रों के आंदोलन और लगातार उठ रहे सवालों के दबाव में सरकार यह कानून लेकर आई है।
छात्र आंदोलन और बल प्रयोग की जांच की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने हाल के छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग का मुद्दा भी सदन में उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान कई छात्र घायल हुए और कुछ को पैलेट गन के छर्रे भी लगे। उन्होंने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग करते हुए सरकार से पूछा कि लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले सादे कपड़ों में मौजूद लोग कौन थे। साथ ही गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए और कहा कि यदि इन सवालों के जवाब नहीं दिए जा सकते तो गृह मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।
सरकार की परीक्षा नीति और एनटीए पर भी उठे सवाल
खरगे ने कहा कि यदि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में कोई बदलाव नहीं किया गया और परीक्षा प्रक्रिया पहले की तरह चलती रही तो भविष्य में फिर ऐसे हालात बन सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्न पत्र लीक मामलों में गिरफ्तार लोगों को अब तक सजा नहीं मिल पाई है। उन्होंने सरकार से देशभर की परीक्षाओं के लिए समयबद्ध वार्षिक कैलेंडर लागू करने और शिक्षा व्यवस्था में खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरने की मांग की।
मनुस्मृति के उद्धरण पर सदन में हुआ हंगामा
अपने संबोधन के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने मनुस्मृति के कुछ अंशों का हिंदी अनुवाद पढ़ा, जिसका सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध किया। सदन में शोरगुल के बीच सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि इस तरह के उद्धरण समाज में विद्वेष का माहौल पैदा कर सकते हैं और इन्हें कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी इस पर आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद सभापति ने कहा कि संबंधित अंश का प्रमाणिक सत्यापन संभव नहीं है, इसलिए उसे सदन की कार्यवाही से निकालने का निर्णय लिया गया। चर्चा के दौरान खरगे ने सरकार से राष्ट्रीय युवा रोजगार रणनीति तैयार करने की मांग भी की।
