फर्जी जॉब पोर्टल से देशभर में ठगी का जाल! 250 युवाओं को बनाया शिकार, नोएडा से मास्टरमाइंड गिरफ्तार

नोएडा: नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को फर्जी नियुक्ति का सपना दिखाकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का नोएडा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। साइबर अपराध शाखा की कार्रवाई में एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित तौर पर देशभर में करीब 250 बेरोजगार युवाओं को निशाना बना चुका था। पुलिस का दावा है कि आरोपी फर्जी जॉब पोर्टल और वेबसाइटों के जरिए नौकरी का झांसा देकर लोगों से विभिन्न शुल्क के नाम पर रकम वसूलता था।

साइबर शिकायत के बाद पुलिस ने बिछाया जाल

साइबर क्राइम थाना पुलिस को 24 जून को ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर मामले की जानकारी मिली थी। जांच के दौरान एक मुखबिर से सूचना मिली कि नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाला एक व्यक्ति सेक्टर-23 क्षेत्र में एटीएम से पैसे निकालने आने वाला है।

सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसकी पहचान बिहार निवासी प्रशांत कुमार श्रीवास्तव के रूप में हुई है, जो फिलहाल ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक आवासीय सोसायटी में रह रहा था।

मोबाइल जांच में मिले ठगी के कई सबूत

गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन और दो एटीएम कार्ड बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार मोबाइल की जांच में व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग, विभिन्न अभ्यर्थियों का डेटा, फर्जी नौकरी ऑफर से जुड़े दस्तावेज और कई कंपनियों के नाम पर तैयार किए गए संदेश मिले हैं।

डिजिटल साक्ष्यों से यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी लंबे समय से संगठित तरीके से साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था।

डेढ़ साल से चला रहा था ठगी का नेटवर्क

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने साथी अमन अग्रवाल के साथ मिलकर अलग-अलग नामों से वेबसाइट और डोमेन तैयार करता था। इन प्लेटफॉर्म्स पर नौकरी से जुड़े आकर्षक विज्ञापन डाले जाते थे और बेरोजगार युवाओं से संपर्क किया जाता था।

कॉल सेंटर के जरिए अभ्यर्थियों को नौकरी मिलने का भरोसा दिलाया जाता था। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस, दस्तावेज सत्यापन शुल्क और अन्य प्रक्रिया शुल्क के नाम पर पैसे जमा कराए जाते थे।

पुलिस के मुताबिक गिरोह पिछले करीब डेढ़ वर्ष से सक्रिय था और अब तक लगभग 250 लोगों को अपना शिकार बना चुका है।

कई राज्यों के युवा बने ठगी का शिकार

जांच में सामने आया है कि उत्तर प्रदेश के अलावा झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई राज्यों के युवा इस गिरोह के झांसे में आए। शिकायतों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस को विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर ठगी के मामलों से भी कड़ियां जुड़ती दिखाई दी हैं।

गिरोह में 7 से 12 लोगों के शामिल होने की आशंका

पुलिस का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में 7 से 12 लोगों की भूमिका हो सकती है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि गिरोह के प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी अलग-अलग तय थी। कुछ लोग कॉलिंग का काम करते थे, जबकि अन्य बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड उपलब्ध कराते थे।

मेट्रो स्टेशन और बस स्टॉप पर भी बनाता था शिकार

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी नोएडा और आसपास के इलाकों में मेट्रो स्टेशन, बस स्टॉप और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर युवाओं से संपर्क करता था। वह बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने का दावा करता और पर्चे बांटकर बातचीत शुरू करता था।

विश्वास में लेने के बाद अभ्यर्थियों से प्रोसेसिंग और प्लेसमेंट शुल्क के नाम पर रकम ली जाती थी। पैसा मिलने के बाद पीड़ितों के नंबर ब्लॉक कर दिए जाते थे।

बैंक खाते और सिम उपलब्ध कराने वाली युवती की तलाश

पूछताछ के दौरान आरोपी ने झारखंड की रहने वाली एक युवती ‘नाज’ का भी नाम लिया है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने बताया कि उक्त युवती बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड उपलब्ध कराती थी। इन्हीं खातों का उपयोग ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया जाता था।

पुलिस अब फरार आरोपी अमन अग्रवाल समेत पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

 

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