शरबत या जूस? सुप्रीम कोर्ट ने सुलझाया ‘रूह अफजा’ का टैक्स टेस्ट

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

गर्मियों में ठंडक देने वाला मशहूर पेय Rooh Afza अब टैक्स की तपिश से राहत में है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ — B. V. Nagarathna और R. Mahadevan ने स्पष्ट किया कि ‘रूह अफजा’ को सिर्फ इसलिए ज्यादा टैक्स स्लैब में नहीं डाला जा सकता क्योंकि उसे ‘शरबत’ कहकर बेचा जाता है।

कोर्ट ने माना कि इसे UPVAT कानून के तहत ‘फ्रूट ड्रिंक’ की श्रेणी में रखा जाएगा। मतलब साफ 12.5% नहीं, केवल 4% VAT।

क्या था पूरा टैक्स विवाद?

मामला Hamdard Laboratories और उत्तर प्रदेश के कमर्शियल टैक्स विभाग के बीच वर्षों से चल रहा था। कंपनी शुरू से इसे फ्रूट ड्रिंक मानकर 4% VAT जमा कर रही थी। लेकिन विभाग का तर्क था इसमें केवल 10% फ्रूट जूस है, जबकि नियमों के मुताबिक 25% होना चाहिए।

इस आधार पर इसे ‘रेसिड्यूरी एंट्री’ में डालकर 12.5% टैक्स लगा दिया गया।

2018 में Allahabad High Court ने भी विभाग का पक्ष लिया था। अदालत ने कहा था कि अगर कोई ग्राहक ‘फ्रूट जूस’ मांगे तो उसे रूह अफजा नहीं दिया जाता — इसलिए यह फ्रूट ड्रिंक नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों पलटा फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि टैक्स वर्गीकरण उपभोक्ता की बोलचाल पर नहीं, उत्पाद की संरचना और कानून की परिभाषा पर आधारित होना चाहिए।

कोर्ट ने माना कि रूह अफजा में 10% फ्रूट जूस है। बाकी हिस्सा इन्वर्ट शुगर सिरप और हर्बल डिस्टिलेट्स का है। इसे पानी या दूध में मिलाकर पीने के लिए बनाया गया है। इसलिए इसे फ्रूट ड्रिंक की कैटेगरी से बाहर करना तर्कसंगत नहीं।

कंपनी को कितना फायदा?

फैसला 2008 से 2012 की अवधि पर लागू होगा। अब 12.5% की जगह केवल 4% VAT देय होगा यानी करोड़ों रुपये के टैक्स डिफरेंस से राहत।

कानूनी भाषा में यह सिर्फ वर्गीकरण का मामला था, लेकिन कारोबारी दुनिया में यह बड़ा आर्थिक झटका या राहत साबित हो सकता है।

टैक्स की गर्मी में ठंडी राहत

कभी ‘शरबत’ कहकर ज्यादा टैक्स, तो कभी ‘फ्रूट ड्रिंक’ कहकर कम लगता है रूह अफजा का असली टेस्ट कोर्टरूम में हुआ। गर्मियों में लोग इसे दूध या पानी में मिलाकर पीते हैं, लेकिन इस बार इसमें कानून की धाराएं भी घुल गई थीं। अब फैसला साफ है नाम से नहीं, कानून से पहचान होगी।

यह फैसला सिर्फ एक ब्रांड की जीत नहीं, बल्कि टैक्स कानून की व्याख्या पर स्पष्ट संदेश है। टैक्स स्लैब तय करते समय शब्दों की बाजीगरी नहीं, कानूनी परिभाषा मायने रखती है। गर्मियों का ये पेय अब कानूनी तौर पर भी ‘ठंडा’ साबित हो चुका है।

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