
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित Padma Awards 2026 में इस बार कई ऐसे नाम सामने आए हैं, जिन्होंने देशभर में चर्चा छेड़ दी है। इनमें गुमनाम नायकों से लेकर जानी-मानी हस्तियां शामिल हैं, लेकिन सबसे ज्यादा सुर्खियों में है झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक शिबू सोरेन का नाम।
शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म विभूषण
केंद्र सरकार ने शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित करने का फैसला किया है। यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि शिबू सोरेन न सिर्फ एक बड़े आदिवासी नेता थे, बल्कि उनकी पार्टी झारखंड में वर्तमान में सत्ता में है और केंद्र की बीजेपी से उसका रिश्ता अक्सर तनावपूर्ण रहा है।
निधन के बाद बदले सियासी सुर?
शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त को दिल्ली में हुआ था। वे लंबे समय से बीमार थे। उनके अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने भी उस वक्त सियासी हलकों में कई संकेत दिए थे। इसके बाद JMM और BJP के रिश्तों में वह तल्खी नजर नहीं आई, जो पहले दिखाई देती थी।
विवाद, एजेंसियां और बदली राजनीति
बीते साल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित आपराधिक मामलों में जेल जाना पड़ा था। उस दौर में JMM और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप चरम पर थे। हेमंत सोरेन ने केंद्र पर एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए थे। लेकिन शिबू सोरेन के निधन के बाद यह टकराव काफी हद तक नरम पड़ा।
चुनावी गणित और भविष्य की तैयारी?
यह सम्मान केवल एक व्यक्ति को श्रद्धांजलि भर नहीं है, बल्कि झारखंड की सियासत में BJP की long-term strategy का हिस्सा भी हो सकता है। 2029 में झारखंड विधानसभा और लोकसभा दोनों के चुनाव होने हैं। झारखंड में 20 लोकसभा सीटें हैं, जो राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाती हैं।

सम्मान या सियासी संदेश?
सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सम्मान आदिवासी समाज को साधने, JMM के साथ संभावित soft-corner या भविष्य के किसी बड़े राजनीतिक समीकरण की भूमिका है? या फिर यह सिर्फ शिबू सोरेन के संघर्ष और योगदान को मिला राष्ट्रीय सम्मान?
चर्चा जारी है…
फिलहाल इतना तय है कि शिबू सोरेन को मिला पद्म विभूषण सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीति में एक नया संदेश और नई बहस जरूर लेकर आया है।
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