
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर किए गए सैन्य हमले के बाद भारत की चुप्पी आखिरकार टूट गई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि “क्षेत्र में शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है” और भारत वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा के समर्थन में खड़ा है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब काराकास अंधेरे में डूबा हुआ है, पावर ग्रिड तबाह है और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो अमेरिका की हिरासत में हैं।
MEA का आधिकारिक बयान: शब्द कूटनीतिक, मतलब गहरा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान साझा करते हुए कहा- “Venezuela की मौजूदा स्थिति चिंताजनक है। भारत हालात पर बारीकी से नजर रखे हुए है और शांतिपूर्ण संवाद के जरिए समाधान की अपील करता है।”
Diplomatic language में कहा गया यह बयान साफ संकेत देता है कि भारत न तो अमेरिका के खुलकर साथ है, न खुला विरोध—बस classic Strategic Balance।
Caracas Blackout: Bomb पहले, बिजली बाद में
US हवाई हमलों में:
- Caracas का बड़ा हिस्सा बिजली विहीन
- Airport और largest airbase तबाह
- Communication network ठप
- लोग घरों में कैद, सड़कों पर सन्नाटा
यानी Freedom Export Package के साथ आया Urban Darkness Combo।
भारतीयों पर नजर: Embassy Alert Mode में
MEA ने साफ किया कि Caracas स्थित Indian Embassy लगातार संपर्क में। भारतीय नागरिकों को हर संभव मदद। Emergency coordination active मतलब, भारत का फोकस फिलहाल Damage Control और Citizen Safety पर है।

Maduro Arrest: Democracy या Detention?
US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि मादुरो पर New York में ट्रायल। अमेरिका में Detention Center में रखा गया। वेनेजुएला का आरोप है कि यह हमला तेल पर कब्जे की साजिश है। दुनिया पूछ रही है – Regime Change या Resource Grab?
शांति का बयान, रणनीति का खेल
भारत ने सीधे अमेरिका को कठघरे में नहीं खड़ा किया, लेकिन शांति, स्थिरता और बातचीत जैसे शब्दों से एक Soft Warning जरूर दे दी।
अब असली परीक्षा होगी UN मंच पर, जहां भारत को तय करना होगा – Bomb या Balance?
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