
दक्षिण गाजा पर एक बार फिर जोरदार धमाका। इस बार निशाना बना खान यूनिस, और वो भी कुवैत अस्पताल के पास बने विस्थापितों के कैंप। जहाँ पहले से घर-विहीन लोग सिर्फ सुरक्षित जगह ढूंढ रहे थे— उसी जगह पर फिर से मौत बरस पड़ी।
एयरस्ट्राइक की लोकेशन: जहाँ मरीज भी, और बेघर भी असुरक्षित
इजरायल ने दावा किया कि यह हमला हाल ही में रफा पर हुए अटैक के जवाब में किया गया। पर जमीन पर तस्वीर कुछ और ही कह रही है— यहाँ न कोई लड़ाकू ठिकाना, न कोई हथियारों की फैक्ट्री, सिर्फ तंबू में रह रहे परिवार।
हमले के बाद कैंपों में भीषण आग लग गई, और देखते ही देखते तंबू राख में बदल गए।
कुवैत अस्पताल के पास—यानी वो जगह जहाँ लोग बचाव की उम्मीद लेकर आते हैं
जहाँ मरीज इलाज पाने आते हैं, वहाँ धमाके की आवाज़ों ने ही दिल दहला दिया। महिलाएँ, पुरुष, बच्चे—कई की मौत और बाकी डर के साए में। गाजा में तो अब अस्पताल, कैंप, घर… सब एक जैसी बर्बादी की लिस्ट में शामिल होते जा रहे हैं।

दुनिया देख रही है—कुछ बोल रही है, कुछ चुप है
संयुक्त राष्ट्र चिंता जता रहा है… यूएस अपील कर रहा है… यूरोप बयान जारी कर रहा है… लेकिन ज़मीन पर आवाज़ वही है ड्रोन की आवाज़, और फिर धमाकों की गूंज।
आग बुझती है, लेकिन सवाल नहीं
गाजा के कैंप में लगी आग तो बुझ जाएगी, पर ये सवाल नहीं— की सुरक्षित जगह आखिर है कहाँ? कुवैत अस्पताल? रफा? खान यूनिस?
या सिर्फ कहाँ नहीं— यही असली सवाल है।
“रुपया हुआ 90 पार— डॉलर बोला: पकड़ सको तो पकड़ो!”
