नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में विधानसभा चुनाव निर्धारित समय से पहले कराए जाने की चर्चा ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। जनगणना और चुनावी प्रक्रिया के संभावित टकराव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने इन राज्यों की इकाइयों को चुनावी तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए हैं। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि संगठन किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहे।
जनगणना और चुनाव एक साथ पड़ सकते हैं भारी
सूत्रों के अनुसार फरवरी 2027 में देशव्यापी जनगणना के दूसरे चरण की शुरुआत प्रस्तावित है। इस चरण में सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और जातिगत आंकड़े जुटाए जाने हैं। जनगणना और विधानसभा चुनाव, दोनों ही बड़े प्रशासनिक अभियान होते हैं जिनमें बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों और संसाधनों की जरूरत पड़ती है।
इसी वजह से चुनाव आयोग और प्रशासनिक स्तर पर यह संभावना जताई जा रही है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और गोवा में विधानसभा चुनाव कुछ सप्ताह पहले कराए जा सकते हैं। वहीं उत्तराखंड में चुनाव और पहले कराने पर भी विचार किए जाने की चर्चा है।
भाजपा ने संगठन को क्यों किया सक्रिय?
पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेतृत्व ने चुनावी राज्यों के कोर ग्रुप और संगठनात्मक इकाइयों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। पार्टी का मानना है कि हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों से बने माहौल का फायदा उठाने के लिए संगठन को अभी से मैदान में उतरना होगा।
भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि हाल के चुनावी नतीजों से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है और इस ऊर्जा को लंबे समय तक बनाए रखना जरूरी है। इसी कारण संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की कवायद शुरू हो गई है।
उत्तराखंड और मणिपुर पर भी नजर
उत्तराखंड में चुनाव जल्दी कराने को लेकर पार्टी के भीतर सकारात्मक राय बताई जा रही है। वहीं मणिपुर में भी अगले वर्ष चुनाव होने हैं और वहां की परिस्थितियों पर पार्टी नेतृत्व लगातार नजर बनाए हुए है। राज्य की सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति को देखते हुए चुनावी रणनीति तैयार की जा रही है।
कांग्रेस को कम समय देने की रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समय से पहले चुनाव कराने की चर्चा के पीछे एक बड़ा राजनीतिक पहलू भी हो सकता है। उत्तर प्रदेश को छोड़ दें तो पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में कांग्रेस भाजपा की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पार्टियों में शामिल है।
भाजपा के भीतर यह आकलन किया जा रहा है कि हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का मनोबल बढ़ा है। ऐसे में यदि चुनाव पहले होते हैं तो विपक्षी दलों को तैयारी और गठबंधन बनाने के लिए अपेक्षाकृत कम समय मिलेगा।
पंजाब में पहले से चल रही हैं अटकलें
पंजाब में समय से पहले चुनाव होने की चर्चा पहले भी सामने आ चुकी है। राज्य की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि अभी तक चुनाव की तारीखों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक दलों ने जमीनी स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी है।
फिलहाल कोई आधिकारिक फैसला नहीं
हालांकि विधानसभा चुनाव समय से पहले कराने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। लेकिन जनगणना, प्रशासनिक जरूरतों और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए चार राज्यों में चुनावी तैयारियां तेज हो गई हैं। आने वाले महीनों में इस मुद्दे पर तस्वीर और साफ हो सकती है।
