कृष्ण जन्मभूमि बनाम ईदगाह मस्जिद — कोर्ट में फिर गूंजे शंख और सुबूत

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

इलाहाबाद हाईकोर्ट में शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही ईदगाह मस्जिद विवाद पर डेढ़ घंटे तक गहन बहस चली। यह सुनवाई अब धीरे-धीरे उस मुकाम पर पहुंच रही है जहां अदालत मामले के मुख्य बिंदुओं को तय करने जा रही है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से दाखिल अमेंडमेंट एप्लीकेशन पर तर्क रखे गए, जबकि माता रुक्मिणी देवी की वंशज नीतू चौहान की ओर से रिज्वाइंडर एफीडेविट दाखिल किया गया।

अगली तारीख 12 दिसंबर — अदालत तय करेगी केस के बिंदु

न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की सिंगल बेंच ने सुनवाई के बाद अगली तारीख 12 दिसंबर दोपहर 2 बजे निर्धारित की है।
इस दिन ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) की ओर से भी अपना जवाब पेश किया जाएगा।

एडवोकेट डॉ. ए.पी. सिंह, जो मंदिर पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने कहा —

“अगली सुनवाई के बाद अदालत केस के मुख्य बिंदु तय करेगी, यानी ये विवाद अब अंतिम रेखा की तरफ बढ़ रहा है।”

2019 से चल रहा कानूनी संघर्ष, अक्टूबर 2023 से हाईकोर्ट में फाइनल फेज

मथुरा का यह सदियों पुराना विवाद अब अयोध्या मॉडल पर सीधे हाईकोर्ट स्तर पर सुना जा रहा है।
अक्टूबर 2023 से लगातार सुनवाई चल रही है।

अब तक 18 सिविल वाद दायर हो चुके हैं, जिनमें शाही ईदगाह मस्जिद को अतिक्रमण बताते हुए मंदिर पक्ष ने जमीन का कब्ज़ा सौंपने और मंदिर के जीर्णोद्धार की मांग की है।

ASI रिपोर्ट पर सबकी निगाहें, इतिहास बोलेगा या अदालत?

मंदिर पक्ष चाहता है कि ASI सर्वे से यह साबित हो कि ईदगाह मस्जिद की जमीन पर प्राचीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के अवशेष मौजूद हैं।
वहीं, वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी इसे “राजनीतिक प्रोपेगेंडा” बता रही है। कोर्ट ने पहले ही साफ किया है कि “सुनवाई धार्मिक नहीं, ऐतिहासिक और कानूनी साक्ष्यों के आधार पर होगी।”

अब देखने वाली बात होगी कि 12 दिसंबर को अदालत किस दिशा में कदम बढ़ाती है।

कोर्ट में ‘जय श्रीकृष्ण’ और ‘वक्फ की वकालत’ — दोनों की गूंज

कोर्टरूम के बाहर माहौल एकदम मिनी-अयोध्या जैसा रहा। मंदिर पक्ष के समर्थकों ने कहा — “कृष्ण जन्मभूमि हमारी आस्था है, जमीन नहीं।” तो मस्जिद पक्ष बोला — “हम अदालत का सम्मान करते हैं, राजनीति का नहीं।”

अयोध्या के बाद अब मथुरा पर सबकी नजरें

2027 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मथुरा केस फिर राजनीतिक गर्मी पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अदालत मंदिर पक्ष के पक्ष में संकेत देती है, तो हिंदुत्व नैरेटिव को नया इंधन मिलेगा।

हालांकि, कोर्ट का रुख अब तक संतुलित और विधिक रहा है — ना किसी भावनात्मक लहर के साथ, ना किसी दबाव के आगे झुका हुआ।

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