छोटे उद्यमियों को मजबूत बनाने पर योगी सरकार का फोकस, सीएफसी परियोजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के निर्देश

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पारंपरिक उद्योगों, हस्तशिल्प, बुनकरी और सूक्ष्म उद्यमों को नई ताकत देने के लिए योगी सरकार ने कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) परियोजनाओं को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया है। सरकार का लक्ष्य है कि ओडीओपी योजना के तहत संचालित सीएफसी का लाभ सीमित लोगों तक न रहकर अधिक से अधिक कारीगरों, बुनकरों और सूक्ष्म उद्यमियों तक पहुंचे।

इसी क्रम में प्रदेश में संचालित 16 सीएफसी परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें योजनाओं की प्रगति और लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई।

सीमित लाभार्थियों पर मुख्यमंत्री ने जताई चिंता

बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई सीएफसी परियोजनाओं में सीमित लाभार्थियों की स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

सरकार ने इसी उद्देश्य से सीएफसी परियोजनाओं में 90 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान और 10 प्रतिशत उद्यमियों का योगदान निर्धारित किया है, ताकि छोटे उद्यमियों को आधुनिक मशीनरी, डिजाइन, परीक्षण, स्किल ट्रेनिंग और कॉमन टूल्स जैसी सुविधाएं आसानी से मिल सकें।

प्रचार-प्रसार बढ़ाने के दिए निर्देश

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएफसी परियोजनाओं को जनहित से जोड़ते हुए बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जाए।

उन्होंने कहा कि मोबाइल संदेश, पम्पलेट, उद्योग बंधु बैठकों और मीडिया के माध्यम से लोगों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा कारीगर और उद्यमी इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें। साथ ही सभी सीएफसी में सिटीजन चार्टर प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए गए।

अंबेडकर नगर से वाराणसी तक कई परियोजनाओं की समीक्षा

बैठक में अंबेडकर नगर, मुरादाबाद, संभल, वाराणसी, खुर्जा, आगरा, मेरठ, सहारनपुर, बरेली, अयोध्या और गाजियाबाद समेत विभिन्न जिलों की परियोजनाओं की समीक्षा की गई।

अंबेडकर नगर बुनकर सीएफसी में करीब 4 करोड़ रुपये की सहायता से स्थापित परियोजना में लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया। वहीं वाराणसी के सिल्क उत्पाद सीएफसी में लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से विकसित सुविधाओं को अधिक से अधिक कारीगरों तक पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा हुई।

बुनकरों को राहत देने के लिए जारी है फ्लैट रेट बिजली योजना

बैठक के दौरान बुनकरों और कारीगरों ने बिजली, धागे की बढ़ती लागत, बाजार प्रतिस्पर्धा और तकनीकी उन्नयन से जुड़ी समस्याएं भी रखीं।

समीक्षा में बताया गया कि योगी सरकार ने बुनकरों को राहत देने के लिए वर्षों तक फ्लैट रेट विद्युत योजना लागू रखी। इसके तहत वर्ष 2006 से 31 मार्च 2023 तक करीब 44 करोड़ रुपये का बिजली व्यय सरकार ने वहन किया।

सरकार की प्राथमिकता है कि पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाए।

गाजियाबाद सीएफसी में युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण

गाजियाबाद के इंजीनियरिंग एवं टूल रूम आधारित सीएफसी की समीक्षा में बताया गया कि वहां सीएनसी मशीन, 3डी प्रिंटिंग, मटेरियल टेस्टिंग और स्किल ट्रेनिंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

अब तक 500 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साथ ही रक्षा क्षेत्र के लिए कंपोनेंट निर्माण की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

मुरादाबाद और संभल परियोजनाओं पर भी जोर

मुरादाबाद के फिजिकल वेपर डिपोजिशन (पीवीडी) प्लांट को पर्यावरण अनुकूल तकनीक का बेहतर उदाहरण बताते हुए उसकी क्षमता बढ़ाने पर चर्चा हुई। वहीं संभल के बटन उद्योग सीएफसी में 70 प्रतिशत से अधिक क्षमता उपयोग को सकारात्मक संकेत माना गया।

अधिकारियों ने कच्चे माल और बिजली आपूर्ति को और बेहतर बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

खुर्जा ब्लैक पॉटरी सीएफसी बना सफलता की मिसाल

बैठक में खुर्जा ब्लैक पॉटरी सीएफसी को सफलता का मॉडल बताया गया। इस परियोजना से 1253 से अधिक लाभार्थी जुड़े हैं और कारोबार 15-20 लाख रुपये से बढ़कर 90-95 लाख रुपये तक पहुंच गया है।

इसे पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया। बैठक में कारीगरों ने मिट्टी भंडारण के लिए अतिरिक्त भूमि की मांग भी रखी।

छोटे उद्योगों को बड़े बाजार से जोड़ने की तैयारी

सहारनपुर वुड क्राफ्ट, आगरा लेदर क्लस्टर, बरेली और मेरठ के गुड़ प्रसंस्करण सीएफसी की भी समीक्षा की गई। मेरठ परियोजना में 1800 किसानों को जोड़कर मूल्य संवर्धन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना हुई।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि उद्योग बंधु बैठकों का आयोजन सीएफसी परिसरों में किया जाए और बड़ी उद्योग इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित कर छोटे उद्यमों को बड़े बाजार और सप्लाई चेन से जोड़ा जाए।

 

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