वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर प्रस्तावित बड़े सैन्य हमले को फिलहाल टाल दिया है। ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ बातचीत की संभावना बनी हुई है और समझौते की दिशा में तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, इस फैसले के पीछे केवल कूटनीतिक पहलू ही नहीं, बल्कि अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर बढ़ता दबाव भी एक अहम कारण माना जा रहा है।
रिपोर्ट में हथियारों के घटते भंडार का दावा
एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 से जारी ईरान संघर्ष के दौरान अमेरिका ने अपनी लंबी दूरी की कई महत्वपूर्ण मिसाइलों का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ATACMS और Precision Strike Missiles (PrSM) के वैश्विक भंडार का लगभग पूरा हिस्सा खर्च हो चुका है।
इसके अलावा अमेरिकी नौसेना की Tomahawk क्रूज मिसाइलों के वैश्विक भंडार का लगभग आधा हिस्सा भी इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
एयर डिफेंस सिस्टम पर भी बढ़ा दबाव
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली पर भी युद्ध का असर दिखाई दे रहा है। आकलन के अनुसार फरवरी से जुलाई के बीच Patriot इंटरसेप्टर का लगभग दो-तिहाई हिस्सा इस्तेमाल हो चुका हो सकता है, जबकि THAAD इंटरसेप्टर के भंडार में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
पहले जारी विभिन्न आकलनों में भी Patriot और THAAD इंटरसेप्टर के बड़े पैमाने पर उपयोग का अनुमान जताया गया था, जिससे अमेरिका की रक्षा तैयारियों पर चर्चा तेज हो गई है।
सऊदी अरब की चिंता भी बनी अहम वजह
रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत की थी। इस दौरान खाड़ी देशों ने ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई और क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे पर हमलों को लेकर चिंता व्यक्त की थी।
बताया गया है कि अमेरिकी सैन्य नेतृत्व के स्तर पर भी युद्ध को आगे बढ़ाने की रणनीति, हथियारों की उपलब्धता और संभावित जोखिमों पर व्यापक चर्चा हुई। इस दौरान कूटनीतिक विकल्प, सहयोगी देशों की सुरक्षा और सैन्य संसाधनों पर दबाव जैसे पहलुओं पर विचार किया गया।
पेंटागन ने क्षमता पर जताया भरोसा
इन रिपोर्टों के बीच अमेरिकी रक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सेना के पास राष्ट्रपति के किसी भी आदेश का पालन करने के लिए आवश्यक सैन्य क्षमता मौजूद है। रक्षा अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी सेना किसी भी संभावित अभियान को संचालित करने में सक्षम है।
फिलहाल ट्रंप प्रशासन की ओर से सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत को प्राथमिकता दिए जाने के संकेत मिल रहे हैं, जबकि क्षेत्रीय हालात और सैन्य तैयारियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
