लखनऊ: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव गुरुवार को रायबरेली से अपनी ‘पीडीए रथयात्रा’ की शुरुआत कर रहे हैं. यह वही रायबरेली है, जिसे कांग्रेस का मजबूत आधार माना जाता है और जहां से राहुल गांधी लोकसभा सांसद हैं. अखिलेश यादव के इस दौरे में हरचंदपुर के सपा विधायक राहुल लोधी के घर जाना और पार्टी की छात्रसभा से जुड़े कार्यकर्ताओं से मुलाकात करना शामिल है.
रायबरेली से ही शुरुआत क्यों?
सपा के मुताबिक, अखिलेश यादव की यात्रा का मकसद उन परिवारों और पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलना है, जो पुलिस या प्रशासन की कार्रवाई से प्रभावित या नाराज हैं. रायबरेली में 17 सितंबर को फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में समाजवादी छात्रसभा और एबीवीपी से जुड़े छात्रों के बीच विवाद हुआ था. इसके बाद सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच भी टकराव की स्थिति बनी थी. इसी घटनाक्रम के बीच अखिलेश का रायबरेली दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
पीडीए के जरिए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
समाजवादी पार्टी लंबे समय से पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समूहों को अपनी राजनीति के केंद्र में रखती रही है. पार्टी का कहना है कि जो लोग किसी कार्रवाई या व्यवस्था से पीड़ित हैं, वे भी उसके पीडीए दायरे में आते हैं. ऐसे में अखिलेश यादव का सीधे पीड़ित परिवारों और कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचना संगठन और सामाजिक आधार को मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है.
2022 के चुनाव में सपा ने जीती थीं चार सीटें
रायबरेली को चुनने के पीछे जिले का विधानसभा चुनावी गणित भी एक अहम पहलू है. 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने रायबरेली जिले की छह सीटों में से चार पर जीत दर्ज की थी. बछरावां से श्याम सुंदर भारती, हरचंदपुर से राहुल लोधी, सरेनी से देवेंद्र प्रताप सिंह और ऊंचाहार से मनोज कुमार पांडेय सपा के टिकट पर जीते थे. हालांकि मनोज पांडेय बाद में भाजपा में शामिल हो गए. फिलहाल जिले में सपा के तीन विधायक हैं.
ऊंचाहार पर भी सपा की नजर
ऊंचाहार सीट भी सपा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है. 2022 में यहां से मनोज कुमार पांडेय ने सपा के टिकट पर जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में वह भाजपा में चले गए. ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सपा के लिए यह सीट दोबारा अपने प्रभाव में लाने की कोशिश का हिस्सा हो सकती है.
कांग्रेस से गठबंधन के बीच सीटों का सवाल
रायबरेली से यात्रा की शुरुआत को सपा-कांग्रेस के संभावित गठबंधन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है. रायबरेली कांग्रेस का पारंपरिक राजनीतिक आधार रहा है और वर्तमान में राहुल गांधी यहां से सांसद हैं. ऐसे में सपा का इसी जिले से अपनी राजनीतिक गतिविधि को आगे बढ़ाना दोनों दलों के बीच भविष्य में सीट बंटवारे की बातचीत के संदर्भ में भी चर्चा का विषय बना हुआ है. हालांकि सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम तस्वीर अभी सामने नहीं आई है.
‘बड़े भाई’ की भूमिका के दावे की चर्चा क्यों?
राजनीतिक विश्लेषण में यह सवाल उठ रहा है कि क्या रायबरेली से यात्रा शुरू कर सपा अपने संगठनात्मक और चुनावी आधार को कांग्रेस के सामने रेखांकित करना चाहती है. 2022 में जिले की चार विधानसभा सीटों पर सपा की जीत और मौजूदा तीन विधायकों की मौजूदगी को पार्टी के स्थानीय आधार के एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि गठबंधन में कौन सी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, यह बातचीत और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
रथ पर सामाजिक न्याय के प्रतीक, जमीन पर संगठन मजबूत करने की तैयारी
सपा ने इस यात्रा के लिए विशेष रूप से तैयार रथ का इस्तेमाल किया है. इस रथ पर डॉ. भीमराव आंबेडकर, राम मनोहर लोहिया, जनेश्वर मिश्र, मुलायम सिंह यादव और बेनी प्रसाद वर्मा जैसे नेताओं की तस्वीरें और सामाजिक न्याय से जुड़े संदेश लगाए गए हैं. यात्रा को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के पीडीए अभियान को जमीन तक पहुंचाने की कवायद के तौर पर पेश किया जा रहा है.
रायबरेली दौरे में आगे क्या कार्यक्रम
अखिलेश यादव रायबरेली पहुंचकर पीडीए रथ के जरिए जिले में कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे. कार्यक्रम के तहत वह हरचंदपुर के विधायक राहुल लोधी के आवास पर भी जाएंगे. इसके अलावा पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात और सभा का कार्यक्रम भी रखा गया है.
