
Tamil Nadu की राजनीति इस वक्त हाई-वोल्टेज ड्रामे में बदल चुकी है। विधानसभा चुनाव 2026 में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी Vijay की Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) अब सरकार बनाने की कोशिशों के बीच बड़े विवाद में फंस गई है। सत्ता तक पहुंचने के लिए TVK को कुछ और विधायकों की जरूरत है और इसी बहुमत की लड़ाई ने अब तमिलनाडु की राजनीति को आरोप, शिकायत और राजनीतिक टकराव के सबसे बड़े मंच पर ला खड़ा किया है।
फर्जी समर्थन पत्र के आरोप से मचा बवाल
TVK ने राज्यपाल को 116 विधायकों के समर्थन का दावा सौंपा, लेकिन इसके तुरंत बाद T. T. V. Dhinakaran ने बड़ा आरोप लगाकर पूरी राजनीति हिला दी। दिनाकरण ने दावा किया कि उनकी पार्टी के विधायक एस कामराज का फर्जी समर्थन पत्र राज्यपाल को दिया गया है। उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने TVK को किसी भी तरह का समर्थन नहीं दिया है और उनकी पार्टी अभी भी NDA के साथ खड़ी है। दिनाकरण के इस बयान के बाद तमिलनाडु में सरकार गठन का पूरा समीकरण अचानक बदलता नजर आने लगा।
विजय के खिलाफ पुलिस शिकायत तक पहुंचा मामला
मामला सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। दिनाकरण सीधे Chennai के गुइंडी थाने पहुंचे और TVK तथा विजय के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि TVK उनकी पार्टी के विधायकों को तोड़ने और खरीद-फरोख्त की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही विधायक एस कामराज के “लापता” होने का मुद्दा भी उठाया गया। इस शिकायत ने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।
TVK ने जारी किया विधायक कामराज का वीडियो
दिनाकरण के आरोपों के बाद TVK ने तुरंत पलटवार किया और विधायक एस कामराज का वीडियो जारी कर दिया। वीडियो में कामराज दावा करते दिखाई दिए कि उन्होंने अपनी इच्छा और खुशी से TVK को समर्थन दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि समर्थन पत्र पार्टी महासचिव की अनुमति के बाद ही दिया गया था। लेकिन दिनाकरण ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। अब तमिलनाडु की राजनीति इस सवाल पर अटक गई है कि आखिर असली सच क्या है और किसका दावा सही है।
बहुमत के नंबर पर फंसा पूरा खेल
238 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत है। TVK के पास 108 सीटें हैं और उसे बहुमत तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है। यही वजह है कि छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की अहमियत अचानक बढ़ गई है। राज्यपाल भी पूरे घटनाक्रम पर बेहद सतर्क नजर बनाए हुए हैं क्योंकि किसी भी गलत कदम से संवैधानिक विवाद खड़ा हो सकता है।
AIADMK भी सत्ता की रेस में एक्टिव
दूसरी ओर AIADMK खेमे ने भी सरकार गठन की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं। दिनाकरण ने दावा किया कि AIADMK के नेतृत्व में सरकार बनाई जा सकती है और Edappadi K. Palaniswami मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं। यानी तमिलनाडु में अब सिर्फ TVK की सरकार का सवाल नहीं है, बल्कि सत्ता के लिए कई राजनीतिक खेमे सक्रिय हो चुके हैं।
खरीद-फरोख्त के आरोपों से गरमाई राजनीति
दिनाकरण ने विजय पर विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश का आरोप लगाया है। अगर यह विवाद और बढ़ा तो मामला अदालत तक भी पहुंच सकता है। फिलहाल हर दल अपने विधायकों को बचाने और संख्या मजबूत करने में जुटा हुआ है। रिसॉर्ट राजनीति, समर्थन पत्र और बंद कमरों की बैठकों ने तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह suspense thriller बना दिया है।
फिल्मों से ज्यादा ड्रामेटिक हुई असली राजनीति
विजय ने फिल्मों में कई बार सत्ता और सिस्टम को चुनौती देने वाले किरदार निभाए हैं, लेकिन असली राजनीति में उनकी पहली बड़ी परीक्षा बेहद कठिन साबित हो रही है। जनता ने उन्हें सबसे बड़ी पार्टी बना दिया, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता अब आरोपों, कानूनी विवाद और राजनीतिक सौदेबाजी के बीच फंसता नजर आ रहा है।
तमिलनाडु में सरकार गठन का मामला अब सिर्फ नंबर गेम नहीं रहा। यह राजनीतिक भरोसे, विधायकों की वफादारी और सत्ता की सबसे बड़ी जंग में बदल चुका है। अब पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विजय बहुमत साबित कर पाएंगे या राज्य एक नए राजनीतिक संकट की तरफ बढ़ेगा।
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