दो बार फेल, पैसे देते ही 21 मिनट में पास! ड्राइविंग सेंटर पर रिश्वतखोरी?

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

Uttar Pradesh की Yogi Adityanath सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और आरटीओ दफ्तरों में होने वाली अवैध वसूली रोकने के लिए मोटर ड्राइविंग टेस्टिंग सेंटर शुरू किए थे। लेकिन Bulandshahr में यही व्यवस्था अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है।

वाई बी बिल्डर के मोटर वाहन ड्राइविंग लाइसेंस एवं टेस्टिंग सेंटर पर रिश्वतखोरी, दबाव और सुनियोजित अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद परिवहन व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

आरोप—जानबूझकर फेल करो, फिर पैसे लेकर पास करो

शिकायत के मुताबिक सेंटर पर अभ्यर्थियों को पहले जानबूझकर फेल किया जाता है। आरोप है कि बेहद कम समय में लगातार टेस्ट लेकर उम्मीदवारों पर मानसिक दबाव बनाया जाता है ताकि वे रिश्वत देने को मजबूर हो जाएं। बताया गया कि करीब डेढ़ घंटे के भीतर तीन टेस्ट लिए जाते हैं, जिनमें शुरुआती दो प्रयासों में फेल दिखाया जाता है। इसके बाद कथित तौर पर पैसे देने पर ही पास कराने का रास्ता खुलता है।

कायतकर्ता ने बताया पूरा घटनाक्रम

बुलंदशहर निवासी शीशपाल शर्मा ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने समधी के बेटे कपिल शर्मा निवासी जिरोली, अनूपशहर के LMV लाइसेंस के लिए आवेदन कराया था। 23 दिसंबर 2025 को आवेदन हुआ और 19 जनवरी 2026 को टेस्ट की तारीख तय हुई। शिकायत के अनुसार कपिल शर्मा का पहला टेस्ट सुबह 11:40 बजे और दूसरा टेस्ट 12:14 बजे लिया गया, लेकिन दोनों बार उन्हें फेल कर दिया गया।

इसके बाद कथित तौर पर सेंटर से जुड़े लोगों ने 5500 रुपये की मांग शुरू कर दी।

पैसे ट्रांसफर होते ही 21 मिनट में ‘पास’

शिकायत में दावा किया गया है कि सेंटर से जुड़े एक व्यक्ति ने आवेदक को मैनेजर रमित सरदार से मिलने को कहा। इसके बाद मयंक नाम के व्यक्ति का नंबर दिया गया, जिसने कथित तौर पर पेटीएम के जरिए 5500 रुपये ट्रांसफर करने को कहा और QR कोड भेजा।

आरोप है कि जैसे ही पैसे ट्रांसफर हुए, महज 21 मिनट के भीतर तीसरा टेस्ट लिया गया और पहले दो बार फेल किए गए अभ्यर्थी को पास घोषित कर दिया गया। यही आरोप अब पूरे मामले को गंभीर भ्रष्टाचार और संगठित रिश्वतखोरी के शक में बदल रहा है।

FIR दर्ज, आरोपी फरार

इस मामले में शिकायतकर्ता की तहरीर पर खुर्जा देहात थाने में FIR दर्ज कर ली गई है। वाई बी बिल्डर के शाहबाज दौलतपुर स्थित ड्राइविंग टेस्टिंग सेंटर के मैनेजर रमित सरदार और उसके अज्ञात साथियों के खिलाफ BNS की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज हुआ है। हालांकि फिलहाल आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

विभाग ने क्या कहा?

Bulandshahr के एआरटीओ सतीश चंद्र ने मामले की जानकारी से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि शिकायत मिलने पर विभागीय जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं भी अवैध वसूली हो रही है तो उसकी लिखित शिकायत विभाग को दी जाए।

सवाल सिर्फ एक सेंटर का नहीं

यह मामला सिर्फ एक टेस्टिंग सेंटर तक सीमित नहीं माना जा रहा। सवाल इस बात पर भी उठ रहे हैं कि अगर आरोप सही हैं तो क्या ड्राइविंग लाइसेंस जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया भी अब दलालों और अवैध नेटवर्क के भरोसे चल रही है? सरकार जिस व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त बताकर लागू कर रही थी, उसी पर अब गंभीर दाग लगते दिखाई दे रहे हैं।

बुलंदशहर का यह मामला परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और टेस्टिंग सेंटरों की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह सिर्फ रिश्वतखोरी नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा से जुड़ी पूरी लाइसेंस प्रणाली पर अविश्वास पैदा करने वाला मामला बन सकता है। अब निगाहें पुलिस जांच और विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं।

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