दो साल… सिर्फ कैलेंडर के पन्ने नहीं थे, बल्कि हर दिन एक डर, हर रात एक दहशत। और फिर उसी गाज़ा की जमीन पर, जहां कभी सिर्फ धमाकों की आवाज गूंजती थी, आज “अल्लाहु अकबर” की पुकार सुनाई दी। यह सिर्फ नमाज़ नहीं थी… यह जिद थी—जिंदगी की, उम्मीद की, और उस यकीन की कि बर्बादी के बाद भी इंसान खड़ा होता है। दो साल बाद लौटी ईद की रौनक Eid al-Fitr के मौके पर Gaza City के Saraya Square में नमाज़ अदा की गई—पूरे दो साल बाद। यह वही जगह…
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ताकत की टकराहट, कीमत एक बच्ची की? 14 महीने की ज़हरा की गलती क्या!
ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, 14 महीने की ज़हरा मोहम्मदी की मौत उस सैन्य हमले में हुई जिसे तेहरान ने अमेरिकी-इजराइली संयुक्त स्ट्राइक बताया है। रिपोर्ट में कहा गया कि बच्ची उस लोकेशन पर मौजूद थी जिसे निशाना बनाया गया। कौन हैं परिवार? ज़हरा मोहम्मदी ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की पोती थी। ईरानी अधिकारियों ने इस घटना को “सिविलियन कैजुअल्टी” का उदाहरण बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। यह दावा ऐसे समय आया है जब क्षेत्रीय तनाव पहले से चरम पर है और हर बयान कूटनीतिक समीकरणों…
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