रात के अंधेरे में इंसानियत सड़क पर उतरी… और कुछ ही सेकंड में वही इंसानियत कुचल दी गई। जो लोग किसी की जान बचाने दौड़े थे, वही खुद मौत के आंकड़े बन गए। सवाल ये नहीं कि हादसा कैसे हुआ… सवाल ये है कि आखिर हमारी सड़कों पर मौत इतनी सस्ती क्यों हो गई है? देर रात 12 बजे के आसपास, उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर में जो हुआ, वो सिर्फ एक एक्सीडेंट नहीं था… वो सिस्टम, स्पीड और संवेदनहीनता का खौफनाक गठजोड़ था। हादसा या हत्याकांड? यह सिर्फ टक्कर नहीं…
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