जब ‘धुरंधर’ देख पाक Critics बोले – भाई, ऐसी फिल्में हमसे नहीं बनतीं!

Ranveer Singh की फिल्म ‘Dhurandhar’ इन दिनों सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान में भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। फिल्म की कहानी, ट्रीटमेंट और परफॉर्मेंस ने दर्शकों को ऐसा बांधा है कि सोशल मीडिया से लेकर फिल्म क्रिटिक्स तक, हर जगह इसकी तारीफ हो रही है। दिलचस्प बात यह है कि तारीफ करने वालों में वो लोग भी शामिल हैं, जो आमतौर पर भारतीय फिल्मों को लेकर बेहद सख्त नजरिया रखते हैं। Karachi से Lyari तक, कहानी ने खींचा ध्यान फिल्म का बड़ा हिस्सा कराची के लयारी…

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2025 Box Office: साउथ vs बॉलीवुड — किसका जादू, किसका डब्बा गुल?

साल 2025 अपने आखिरी पड़ाव पर है और फिल्मों की दुनिया में पूरे साल जबरदस्त हलचल रही। IMDB आधारित आंकड़ों के हिसाब से इस साल करीब 100 फिल्मों ने सिनेमाघर में दस्तक दी।लेकिन असली सवाल — Hit कौन हुआ? Flop किसकी किस्मत में था? और किसने Box Office पर तिरंगा फहराया? एक तरफ South ने लगातार बड़े दमदार कंटेंट से मैदान गर्म रखा, तो दूसरी तरफ Bollywood की हिट-फ्लॉप की गाड़ी कभी धड़ाम… कभी धमाका करती रही। चलते हैं पूरे साल की मजेदार रिपोर्ट कार्ड पर। South Indian Films 2025:…

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“धरम पाजी के नाम सबकी आंखें नम—देश भर से उमड़ा प्यार!”

भारत के आइकॉनिक अभिनेता धरम पाजी यानी धर्मेंद्र के निधन की खबर ने पूरे देश को हिला दिया है। राजनीति से लेकर सिनेमा जगत तक हर ओर शोक की लहर दौड़ गई। करीब सात दशकों तक सिनेमा में सक्रिय रहे इस सुपरस्टार को लेकर देशभर की बड़ी हस्तियों ने भावुक श्रद्धांजलि दी। राहुल गांधी बोले—“भारतीय कला जगत की अपूरणीय क्षति” कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि धर्मेंद्र जी का निधन बेहद दुखद है।उन्होंने लिखा:“महान अभिनेता धर्मेंद्र जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है…

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वेंटिलेटर सपोर्ट पर बॉलीवुड के ही-मैन, फैंस कर रहे हैं दुआएं

हिंदी सिनेमा से दिल तोड़ देने वाली खबर सामने आई है। बॉलीवुड के सीनियर एक्टर धर्मेंद्र को सांस लेने में परेशानी के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक, डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा है और फिलहाल उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र को सांस लेने में दिक्कत होने के बाद तुरंत ब्रीच कैंडी अस्पताल लाया गया। वहां डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा है। परिवार के सभी…

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ममता कुलकर्णी की क्लीन चिट “दाऊद इब्राहिम आतंकवादी नहीं है”

बॉलीवुड की पूर्व एक्ट्रेस और मौजूदा समय में किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर श्री यामाई ममता नंद गिरि (Mamta Kulkarni) एक बार फिर सुर्खियों में हैं. वजह कोई फिल्मी रोल या ग्लैमरस फोटोशूट नहीं, बल्कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) पर दिया गया उनका बेहद चौंकाने वाला बयान है. गोरखपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता कुलकर्णी ने ‘भाईजान’ को लेकर जो कहा, उसने सियासी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक, सब जगह एक नई बहस छेड़ दी है. दाऊद इब्राहिम पर ममता कुलकर्णी का ‘चौंकाने’ वाला दावा ममता…

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आवारा (1951): “आवारा हूँ”… और पूरी दुनिया दीवानी हो गई!

1951 में जब राज कपूर ने “आवारा” बनाई, तो शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि ये फिल्म एक इंटरनेशनल लव अफेयर में बदल जाएगी। फिल्म में एक गरीब चोर, एक हाई-सोसाइटी लॉ स्टूडेंट, और एक कट्टरपंथी जज की तिकड़ी ने जो सोशल ड्रामा रचा, वो आज भी यादगार है। जज साहब बोले: “अपराधी का बेटा अपराधी!” कहानी शुरू होती है एक ज़िला न्यायाधीश रघुनाथ से, जिनकी थ्योरी है – DNA ही destiny है! लेकिन जब उनके अपने बेटे ने चोर बनकर उनके सिद्धांत की वाट लगा दी, तो मजनू…

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“किंग खान को मिला ‘नेशनल क्राउन’, एक्टिंग अब सिर्फ़ काम नहीं ‘कर्तव्य’ है!”

शुक्रवार को शाहरुख़ ख़ान ने एक्स (Twitter) पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने अंदाज़ में 71वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार के लिए भारत सरकार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और ज्यूरी को धन्यवाद दिया। “यह सिर्फ़ एक अवॉर्ड नहीं… एक रिमाइंडर है कि मेरी कला का समाज में मतलब है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक्टिंग अब केवल प्रोफेशन नहीं, एक सामाजिक ज़िम्मेदारी बन चुकी है। ‘जवान’ ने दिल भी जीता, नेशनल अवॉर्ड भी ‘जवान’ में SRK के दमदार डबल रोल और सामाजिक सन्देश ने बॉक्स ऑफिस से लेकर सरकारी…

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रेट्रो रिव्यू हकीकत : जब देशभक्ति और बलिदान के सीन गूंजे थे स्क्रीन पर

1964 में बनी “हकीकत”, एक ऐसी फिल्म थी जिसने न केवल युद्ध की कच्ची सच्चाई दिखायी, बल्कि भारतीय सैनिकों की वीरता, उनके बलिदान और संघर्ष को भी स्क्रीन पर जीवंत किया। अगर आप सिनेमा के शौकिन हैं और अभी तक “हकीकत” नहीं देखी, तो मानो आप बॉलीवुड के उस खास दौर से अंजान हैं, जब हर फिल्म एक ज़िंदगी के रूप में बनती थी। फिल्म का संघर्ष: युद्ध या तो आप जीतते हैं, या फिर एक नई कहानियाँ बनाते हैं! चेतन आनंद द्वारा निर्देशित इस फिल्म की कहानी 1962 के…

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